April 19, 2024

एक्सपर्ट से जानें क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम, इसकी वजहें, लक्षण, बचाव एवं उपचार

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दूसरों को लेकर हमेशा ये सोच रखना कि अगला व्यक्ति ज्यादा काबिल है और ये सोचकर परेशान रहना तनाव लेना एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसे इंपोस्टर सिंड्रोम कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में इसकी वजहें बचाव एवं उपचार के बारे में।

हमारे बीच ऐसे कई लोग मौजूद होते हैं जो अक्सर दूसरों से अपनी तुलना करके खुद को हमेशा कमजोर समझते रहते हैं और परेशान रहते हैं। ऐसी स्थायी मनोदशा इंपोस्टर सिंड्रोम नामक मनोवैज्ञानिक समस्या का कारण बन सकती है। इससे पीड़ित व्यक्ति के मन में हमेशा यह भम्र बना रहता है कि वह रंग-रूप, शिक्षा, करियर, आर्थिक-सामाजिक स्थिति की दृष्टि से अपने आसपास के लोगों की तुलना में काफी पीछे है या पिछड़ता जा रहा है। यही सोचकर वह इतना निराश हो जाता है कि खुद आगे बढ़ने की कोशिश भी नहीं करता और तनाव, डिप्रेशन से घिरता जाता है।

इंपोस्टर सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण

– आत्मविश्वास में कमी

– कोई भी काम शुरू करने से पहले मन में डर रहना

– अपनी योग्यता औऱ क्षमता पर संदेह करना

– हमेशा चिंतित और उदास रहना

– किसी भी काम की शुरुआत से पहले असफलता के बारे में सोचना आदि।

इंपोस्टर सिंड्रोम की वजहें 

जिन लोगों की परवरिश बहुत ज्यादा संरक्षण भरे माहौल में होती है उनके व्यक्तित्व का विकास सही ढंग से नहीं होता और भविष्य में उन्हें ऐसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा कुछ आकस्मिक घटनाओं जैसे- कोई गंभीर बीमारी, बिजनेस में बड़ा नुकसान या नौकरी छूटने के बाद कुछ लोगों का मनोबल टूट जाता है और वे इंपोस्टर सिंड्रोम के शिकार हो जाते हैं। कोविड महामारी के बाद भी कुछ लोगों में इसके लक्षण नजर आ रहे हैं।

बचाव एवं उपचार

– अपनों से खुलकर बातचीत करें। अपनी परेशानियां करीबियों से जरूर शेयर करें।

– नियमित रूप से योग और मेडिटेशन करने की कोशिश करें। फिटनेस के साथ ही इससे मन शांत और तनावमुक्त रहता है।

– इन कोशिशों के बावजूद भी अगर मनोदशा में कोई सुधार न हो तो क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें।

– आमतौर पर काउंसिलिंग से यह समस्या दूर हो जाती है।

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