July 3, 2026

महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में बैन किया स्टिंग एनर्जी ड्रिंक

बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रही

मुंबई, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लाखों छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है। युवाओं और स्कूली बच्चों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर अब स्कूल परिसरों और उनके 500 मीटर के दायरे में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि इस पेय पदार्थ में मौजूद अत्यधिक कैफीन और चीनी की मात्रा बच्चों और किशोरों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, जिसे देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

राज्य सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अब ‘स्टिंग’ एनर्जी ड्रिंक को भी उन प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में डाल दिया गया है, जिनमें पहले से गुटखा, पान मसाला, तंबाकू उत्पाद और सिगरेट शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी दुकानदार, गुमटी या स्टोर संचालक स्कूल परिसर या उसके 500 मीटर के दायरे में यह एनर्जी ड्रिंक बेचता हुआ पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह गंभीर मुद्दा हाल ही में विधानसभा में विधायक विक्रम पचपुते द्वारा पुरजोर तरीके से उठाया गया था। उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया था कि इस एनर्जी ड्रिंक में कैफीन और शुगर का खतरनाक मिश्रण है, जिससे कम उम्र के बच्चों को इसकी गंभीर लत लग रही है। विधायक ने दावा किया था कि प्रयोगशाला में नमूनों की जांच के दौरान भी ऐसे कई तत्व सामने आए हैं, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ऐसे पेय पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए विशेष नियम बनाने की मांग भी की थी।

विधानसभा में इस मामले पर जवाब देते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने बताया कि विभाग को स्कूलों के आसपास इस ड्रिंक की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही, राज्य के सभी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को एक विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि छात्रों और अभिभावकों को अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा सके। सरकार का मुख्य लक्ष्य बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखना है और नियमों की अनदेखी करने वालों से अब सख्ती से निपटा जाएगा।

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