डीसी अनुपमा अंजली ने ली दयालु-2 योजना की समीक्षा बैठक
आवारा पशुओं के हमले या कुत्ते के काटने से प्रभावित परिवारों को सरकार देगी आर्थिक सहायता
सरल हरियाणा ऑनलाइन पोर्टल पर करें आवेदन : डीसी
नारनौल, । उपायुक्त अनुपमा अंजली की अध्यक्षता में आज दयालु 2 योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए जिला स्तरीय कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान डीसी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई इस जनकल्याणकारी योजना के तहत आने वाले मामलों की पूरी संवेदनशीलता से जांच की जाए।
उन्होंने बताया कि सरकार की मंशानुसार पात्र परिवारों को बिना किसी देरी के समय पर सहायता राशि प्रदान करना सुनिश्चित करें ताकि पीड़ितों को प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
उपायुक्त ने बताया कि किसी भी नागरिक की कुत्ते के काटने या आवारा पशुओं के हमले के कारण घायल होने अथवा मृत्यु हो जाने पर निर्धारित आर्थिक सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इसके लिए पीड़ित को 90 दिन के अंदर-अंदर आवेदन करना होता है। उपायुक्त ने पशु से होने वाली दुर्घटनाओं से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता से सत्यापन करने का आदेश दिया ताकि प्रभावित आश्रितों को तुरंत राहत मिले। इसमें घायल होने पर कम से कम 10 हजार तथा मृत्यु होने पर 5 लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जाती है। अब तक जिला स्तर पर इस योजना के तहत कुल 32 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी पर कमेटी ने आज विचार विमर्श किया। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार, एसडीएम नारनौल अनिरुद्ध यादव, एसडीएम महेंद्रगढ़ योगेश सैनी, एसडीएम नांगल चौधरी उदय सिंह, आरटीए मनोज कुमार, एसडीएम कनीना डॉ जितेंद्र सिंह, सीएमओ डॉ अशोक कुमार तथा जिला सांख्यिकी अधिकारी अनिता के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
ये है दयालु-1 और दयालु-2 योजना में अंतर
नारनौल। मुख्यमंत्री द्वारा अंत्योदय परिवारों को सामाजिक सुरक्षा कवच देने के लिए दयालु 1 योजना शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत परिवार पहचान पत्र में सत्यापित 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के सदस्य की सामान्य दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता होने पर वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके विपरीत, दयालु 2 योजना का दायरा अधिक विस्तृत है। यह योजना विशेष रूप से आवारा पशुओं के हमले, सांड या अन्य जानवरों की टक्कर और कुत्ते के काटने जैसी आकस्मिक आपदाओं से उत्पन्न गंभीर चोट, दिव्यांगता या मृत्यु के मामलों में पीड़ितों और उनके आश्रितों को सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए बनाई गई है।
