होर्मुज से यूएई ने चुपचाप पार करा लिए 4 विशाल तेल टैंकर
नाकाबंदी के बीच रडार से गायब हुए जहाज
अबू धाबी, मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और ईरान के कड़े तेवरों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक बेहद जोखिम भरा सीक्रेट ऑपरेशन अंजाम दिया है। खाड़ी में युद्ध के मंडराते बादलों के बावजूद यूएई ने बेहद खामोशी और सावधानी के साथ होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते अपनी तेल सप्लाई जारी रखी है। रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने अप्रैल महीने में कम से कम 60 लाख बैरल कच्चा तेल खाड़ी से बाहर भेजा है। इसमें 40 लाख बैरल अपर जाकुम क्रूड और 20 लाख बैरल दास क्रूड शामिल है, जिसे चार विशाल टैंकरों के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया।
ईरानी सेना की नजरों और हमलों से बचने के लिए यूएई ने समुद्र में बड़ी चाल चली। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने अपने कई तेल टैंकरों के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी लोकेशन ट्रैकर को पूरी तरह से बंद कर दिया था। रडार बंद होने की वजह से इन जहाजों की असल लोकेशन ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो गया। दिलचस्प बात यह है कि रडार से गायब होकर तेल सप्लाई करने का यह वही भूतिया तरीका है, जिसे खुद ईरान भी लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए खुलेआम इस्तेमाल करता आया है।
होर्मुज स्ट्रेट के बेहद संवेदनशील इलाके को पार करने के बाद इन टैंकरों ने समुद्र के बीचों-बीच ही दूसरे जहाजों में तेल को ट्रांसफर (शिप-टू-शिप ट्रांसफर) किया। इसके बाद इस कच्चे तेल को मलेशिया, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों की रिफाइनरियों तक सुरक्षित पहुंचाया गया, जबकि कुछ हिस्सा ओमान के स्टोरेज टर्मिनल में भी भेजा गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि हफीत नामक जहाज 20 लाख बैरल तेल लेकर होर्मुज पार कर मलेशिया की पेंगरांग रिफाइनरी पहुंचा। वहीं, अलीएकमोन-1 नाम के एक अन्य टैंकर ने 20 लाख बैरल क्रूड तेल सुरक्षित ओमान पहुंचाया।
इस पूरे ऑपरेशन में यूएई ने कितना बड़ा जोखिम उठाया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इराक, कुवैत और कतर जैसे अन्य खाड़ी देशों ने तनाव के डर से अपनी तेल बिक्री या तो बहुत कम कर दी है या पूरी तरह रोक दी है। वहीं, सऊदी अरब अब सिर्फ लाल सागर के रास्ते ही अपना तेल भेज पा रहा है।
