May 8, 2026

मां बनने के सफर को बनाए आसान, सही तरीके से करें योग

मां बनने का सफर किसी भी महिला के जीवन का सबसे खास समय होता है। इस दौरान शरीर ही नहीं, मन भी बहुत सारे बदलावों से गुजरता है। कभी थकान ज्यादा होती है, कभी भावनाएं ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं, तो कभी शरीर नए अनुभवों के साथ खुद को ढाल रहा होता है। ऐसे में सही तरीके से किया गया योग इस पूरे सफर को आसान और संतुलित बना सकता है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि गर्भावस्था के हर स्टेज पर शरीर की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए योग भी उसी हिसाब से करना चाहिए। यही वजह है कि ट्राइमेस्टर-विशेष योग को आज बहुत सुरक्षित और उपयोगी माना जाता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की मानें तो पहला ट्राइमेस्टर वह समय होता है जब शरीर नई स्थिति में खुद को एडजस्ट कर रहा होता है। इस दौरान हल्की-फुल्की गतिविधियां और सूक्ष्म व्यायाम बहुत मदद करते हैं, जैसे गर्दन को धीरे-धीरे आगे-पीछे और दाएं-बाएं घुमाना, कंधों को हल्के से घुमाना, घुटनों और टखनों की हलचल करना। इसके अलावा, ताड़ासन, वृक्षासन, दंडासन, सुखासन और शवासन जैसे सरल आसन किए जा सकते हैं। इस समय गहरी और शांत सांस लेने वाले अभ्यास जैसे नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम मन को भी शांत रखते हैं। ध्यान और शांति पाठ इस स्टेज में मानसिक संतुलन देने में मदद करते हैं।
दूसरा ट्राइमेस्टर अक्सर सबसे स्थिर और आरामदायक माना जाता है। इस समय शरीर थोड़ा ज्यादा सक्रिय हो सकता है, इसलिए योग अभ्यास भी थोड़ा बढ़ाया जाता है। इसमें ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन और कटी चक्रासन जैसे खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल होते हैं। बैठकर किए जाने वाले आसनों में बद्धकोणासन, शशांकासन, मार्जरी आसन और सुखासन बहुत फायदेमंद होते हैं। दीवार के सहारे विपरीत करणी और शवासन शरीर को आराम देते हैं। इस चरण में उज्जायी प्राणायाम भी किया जा सकता है, जो सांस और मन दोनों को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
तीसरा ट्राइमेस्टर सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौरान शरीर भारी महसूस कर सकता है और थकान जल्दी होती है। इसलिए यहां योग बहुत ही हल्का और सुरक्षित होना चाहिए। ताड़ासन, त्रिकोणासन और बैठकर किए जाने वाले सरल आसन जैसे उपविष्ट कोणासन और सुखासन इस समय उपयोगी होते हैं। सुप्त बद्धकोणासन और शवासन शरीर को आराम देते हैं। सांस से जुड़े अभ्यास जैसे नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम मन को शांत रखने में मदद करते हैं। इस समय ओम ध्यान या सो-हम ध्यान मानसिक स्थिरता देता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि योग कभी भी जबरदस्ती या जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। शरीर जितना सहज महसूस करे, उतना ही अभ्यास सही माना जाता है। हर स्टेज पर अलग तरह की ताकत की जरूरत होती है कहीं लचीलापन, कहीं संतुलन और कहीं सिर्फ आराम और शांति।

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