July 17, 2026

नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग का काम केवल मतदाता सूची का नियंत्रण और देखरेख करना है, नागरिकता छीनना या देना नहीं। इसलिए अगर किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो गई है। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने उन लोगों को बड़ी राहत दी है जिनके नाम इस विशेष अभियान के तहत सूची से हटाए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है। बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बिहार एसआईआर मामले का हवाला देते हुए कहा कि कानून की स्थिति पूरी तरह साफ है। अगर कोई अपीलीय ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल न करने का फैसला सुनाता है, तो भारतीय निर्वाचन आयोग को नागरिकता के निर्धारण के लिए उस मामले को सीधे संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के पास भेजना होगा, क्योंकि आयोग के पास इसका अधिकार ही नहीं है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट के सामने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े और जमीनी हकीकत रखी। उन्होंने दलील दी कि राज्य में करीब 33.5 लाख अपीलें अभी भी लंबित पड़ी हैं। अपीलों के इस तरह अटके रहने के कारण सबसे बड़ा नुकसान गरीब जनता को हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटने या अपील पेंडिंग होने के बहाने लोगों को राशन, अन्नपूर्णा योजना और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी सुविधाओं के लाभ से जबरन वंचित किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह गलत है।

वरिष्ठ वकील शंकरनारायण ने ट्रिब्यूनलों के काम करने के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए और कहा कि व्यवस्था में भारी देरी और असंगतियां हैं। उन्होंने कोर्ट को सुझाव दिया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ट्रिब्यूनलों के सभी आदेशों को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी मांग रखते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास भारत सरकार द्वारा जारी किया गया वैध पासपोर्ट मौजूद है, तो उसे उसकी नागरिकता का पर्याप्त और पक्का प्रमाण माना जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट इस समय पश्चिम बंगाल के इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़े विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार कर रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अनुसार फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के तहत दाखिल, स्वीकार या खारिज किए गए आवेदनों का पूरा डेटा जनता के सामने रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर आगे की विस्तृत सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

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