April 17, 2026

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर लगी रोक

नई दिल्ली, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी के मामले में खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब भी तलब किया है।

यह पूरा विवाद पवन खेड़ा द्वारा किए गए उन दावों से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी रिनीकी भुइयां के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनीकी भुइयां ने असम पुलिस में खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। असम पुलिस की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से 10 अप्रैल को उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिल गई थी। असम सरकार ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ी दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान सबसे अहम मोड़ तब आया जब एसजी ने बताया कि खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में अधिकार क्षेत्र साबित करने के लिए अपनी पत्नी का आधार कार्ड पेश किया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि रिकॉर्ड पर रखे गए आधार कार्ड के मुख्य पृष्ठ पर तो नाम है, लेकिन पीछे उनकी पत्नी का दिल्ली का पता दर्ज है। तुषार मेहता ने इसे कानून का खुला दुरुपयोग और ‘अपनी सुविधानुसार कोर्ट चुनने’ (फोरम शॉपिंग) का मामला बताया।

सॉलिसिटर जनरल की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी एक गलत या फर्जी दस्तावेज पेश करके हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अनुचित लाभ उठाने के प्रयास पर हैरानी जताई। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने पवन खेड़ा के लिए कानूनी रास्ता खुला रखते हुए स्पष्ट किया है कि अगर वह अब असम की किसी उचित और अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के इस स्टे (रोक) वाले आदेश का उस याचिका पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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