भारत में बैन हुई दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज
जी5 ने जारी किया आधिकारिक बयान
नई दिल्ली, अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म सतलुज भारत में रिलीज होने के महज दो दिन बाद ही ओटीटी मंच से हटा दी गई है। करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म 3 जुलाई को जी5 पर प्रदर्शित की गई थी। हालांकि अब भारत में यह फिल्म दर्शकों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसकी जानकारी स्वयं जी5 ने अपने आधिकारिक सामाजिक माध्यम के जरिए साझा की है। जी5 ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सतलुज को रिलीज के बाद दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला और इसके लिए सभी दर्शकों का धन्यवाद। मंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिल्म और उसकी रचनात्मक सोच के साथ मजबूती से खड़ा है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं रखा जाएगा।
जी5 ने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद फिल्म को दोबारा भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस फिल्म का निर्माण निर्देशक हनी त्रेहान ने किया है। शुरुआत में इसका नाम पंजाब 95 रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर सतलुज कर दिया गया। फिल्म को पहली बार वर्ष 2022 में प्रमाणन के लिए भेजा गया था, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
निर्देशक के अनुसार, प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान कई बार फिल्म में संशोधन और दृश्य हटाने की मांग की गई। इसी कारण फिल्म की रिलीज लगातार टलती रही और इसे दर्शकों तक पहुंचने में करीब चार वर्ष का समय लग गया।
किन बदलावों को लेकर हुआ विवाद?
निर्देशक हनी त्रेहान पहले ही बता चुके हैं कि फिल्म को मंजूरी देने से पहले कई महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए थे। इनमें मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का नाम, फिल्म का मूल शीर्षक, तिरंगे से जुड़े दृश्य, गुरबाणी की आवाजें और अन्य कई हिस्सों में परिवर्तन की बात कही गई थी।
निर्देशक का कहना था कि यदि इतने व्यापक बदलाव किए जाते, तो फिल्म की मूल भावना ही बदल जाती।
रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या फिल्म को बड़े पैमाने पर संपादित कर प्रदर्शित किया गया है। इन अटकलों पर निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने स्पष्ट किया था कि फिल्म की कहानी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके अनुसार केवल फिल्म का नाम बदला गया है, बाकी प्रस्तुति पहले जैसी ही रखी गई है।
सतलुज की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित बताई जाती है। फिल्म में पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है, जब 1980 और 1990 के दशक में राज्य में आतंकवाद और उग्रवाद के दौर के दौरान कथित रूप से कई लोगों के लापता होने, फर्जी मुठभेड़ों और अवैध हिरासत जैसे मामलों की चर्चा रही थी।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं।
फिल्म के भारत में हटाए जाने के बाद अब तक अभिनेता दिलजीत दोसांझ और निर्देशक हनी त्रेहान की ओर से इस फैसले पर कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म दोबारा भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी या नहीं।
