सिविल अस्पताल बंगाणा की बदली तस्वीर: ओपीडी 150 पार
कायाकल्प अवार्ड से प्रदेश में तीसरा स्थान
बंगाणा (अजय कुमार): उपमंडल बंगाणा का सिविल अस्पताल अब स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है। कभी सीमित संसाधनों और सुविधाओं के लिए जूझने वाला यह अस्पताल आज आधुनिक व्यवस्थाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के कारण क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। हाल ही में अस्पताल को प्रदेश स्तर पर कायाकल्प अवार्ड में तीसरा स्थान हासिल हुआ है, जिसके तहत तीन लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है।
कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा के प्रयासों से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार काम हुआ है। इसका सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ और एमडी डॉक्टर की नियुक्ति के बाद मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन ओपीडी 150 के पार पहुंच चुकी है, जो पहले की तुलना में बड़ा सुधार है।
महिलाओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता और अल्ट्रासाउंड सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है। अब मरीजों को उपचार के लिए दूरदराज के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल रहा है, जिससे लोगों का भरोसा भी अस्पताल पर लगातार बढ़ रहा है।
अस्पताल में कैंटीन और उचित मूल्य की दुकान शुरू होने से मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त सुविधा मिली है। अब अस्पताल परिसर में ही जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने लगी हैं, जिससे इलाज के दौरान होने वाली परेशानियां काफी हद तक कम हुई हैं।
हालांकि, क्षेत्रवासियों की मांग है कि अस्पताल में जल्द ही ऑपरेशन थिएटर और सीटी स्कैन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी शुरू की जाएं, ताकि गंभीर मरीजों को भी स्थानीय स्तर पर ही उपचार मिल सके और उन्हें बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
इस संबंध में कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। अधिकांश बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त कर दी गई हैं और अब प्राथमिकता ऑपरेशन थिएटर स्थापित करने की है। सरकार के सहयोग से इसे जल्द शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
स्पष्ट है कि सिविल अस्पताल बंगाणा अब तेजी से प्रगति की राह पर है और आने वाले समय में यह क्षेत्र के लोगों के लिए और भी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा का केंद्र बनकर उभरेगा।
