कल्पक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालित होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरवमय क्षण: इं. केके सूद
यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण (06 अप्रैल, 2026) है कि कल्पक्कम (तमिलनाडु) में 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर लिया है जोकि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की ओर एक बहुत बड़ी छलांग है। क्रिटिकलिटी का अर्थ तात्पर्य यह है कि रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन (फिशन) की श्रृंखला प्रक्रिया स्व-पोषी (ऑटोटरोफिक) हो जाती है, यानी बाहरी हस्तक्षेप के बिना निरंतर ऊर्जा उत्पन्न होने लगती है और, यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे अधिक उत्पादन (यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदलकर) करता है। कल्पक्कम स्थित 500 मेगावाट के स्वदेशी ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ का सफलतापूर्वक परिचालन शुरू होना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि न केवल हमें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित करेगी। यह उपलब्धि भारत को मशहूर वैज्ञानिक स्वर्गीय डा. होमी भाभा द्वारा परिकल्पित तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण (Stage-III) का प्रवेश द्वार पर ल आई है। गौरतलब है कि भारत के पास थोरियम का विशाल भंडार है, लेकिन इसे सीधे ईंधन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। दूसरे चरण के ये रिएक्टर थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में बदलेंगे, जो तीसरे चरण के ‘थोरियम आधारित रिएक्टरों’ के लिए मुख्य ईंधन होगा। इस गौरवशाली अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई। निस्संदेह, इस महान सफलता के पीछे हमारे सबंधित वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की जटिल चुनौतियों बावजूद, दशकों की अनथक मेहनत, अटूट धैर्य, निष्ठा और असाधारण प्रतिभा छिपी है। राष्ट्र आपके इस योगदान के लिए सदैव आपका आभारी रहेगा। वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की इस शानदार उपलब्धि को कोटि-कोटि नमन! रूस के बाद भारत व्यावसायिक रूप से फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।
इं. कृष्ण कान्त सूद, सेवानिवृत्त डिप्टी-चीफ इंजीनियर, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, नंगल।
