भूमि एवं संपत्ति अधिकारों पर महिला आयोग चलाएगा जन जागरूकता शिविर – विद्या नेगी
कांगड़ा जिला में महिलाओं के भूमि अधिकारों पर अध्ययन में सामने आई असमानताएं
भूमि एवं संपत्ति स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित
पर्वतीय महिला विकास ट्रस्ट (पीएमवीटी) द्वारा कांगड़ा जिला में महिलाओं के भूमि अधिकारों की स्थिति पर किए गए एक विस्तृत अध्ययन कर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आज यहां आयोजित किया गया जिसमें महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विद्या नेगी ने कहा कि भूमि स्वामित्व महिलाओं को मिले इस दिशा में भविष्य में महिला आयोग जागरूकता अभियान चलाएगा। इसके लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित होंगे जिसमें विशेषज्ञ महिलाओं को एवं समाज के अन्य वर्गों को जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि भूमि और संपत्ति केवल आर्थिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार भी हैं। आज भी समाज में महिलाओं की भूमि एवं संपत्ति स्वामित्व में भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित है जबकि महिलाओं का परिवार, कृषि और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है, फिर भी संपत्ति पर उनका अधिकार अक्सर कम दिखाई देता है।
महिलाओं को भूमि और संपत्ति का स्वामित्व मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है तथा परिवार और समाज में उनका सम्मान भी बढ़ता है। शोध बताते हैं कि जिन महिलाओं के पास संपत्ति का स्वामित्व होता है, वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अधिक प्रभावी निर्णय ले पाती हैं।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करें, उन्हें संपत्ति के स्वामित्व के लिए प्रोत्साहित करें और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाएं। बेटियों को भी परिवार की संपत्ति में समान अधिकार देना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर ऐसा समाज बनाने का संकल्प लें जहाँ महिलाओं को भूमि और संपत्ति पर समान अधिकार प्राप्त हो तथा वे आत्मविश्वास, सम्मान और स्वावलंबन के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी पूर्ण भागीदारी निभा सकें।
भूमि एवं संपत्ति अधिकारों में महिलाओं की भूमिका सीमित
पर्वतीय महिला विकास ट्रस्ट द्वारा कांगड़ा जिले में महिलाओं के भूमि अधिकारों की स्थिति पर किए गए एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार कानूनी प्रावधानों के बावजूद भूमि एवं संपत्ति के स्वामित्व, विरासत और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। अध्ययन का उद्देश्य महिलाओं के भूमि अधिकारों की वास्तविक स्थिति, विरासत संबंधी प्रथाओं, कानूनी जागरूकता तथा सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच का आकलन करना था।
10 पंचायतों के 302 लोगों पर किया अध्ययन
अध्ययन के तहत कांगड़ा जिला की 10 पंचायतों में 302 उत्तरदाताओं का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें 73 प्रतिशत महिलाएं थीं। सर्वेक्षण में 66 प्रतिशत उत्तरदाता अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित थे।
घरों का 76 फीसदी स्वामित्व पुरुषों के नाम
अध्ययन में पाया गया कि 76 प्रतिशत घरों का स्वामित्व पुरुषों के नाम पर है, जबकि केवल 18 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम दर्ज हैं। मात्र 6 प्रतिशत संपत्तियां संयुक्त स्वामित्व या अन्य श्रेणी में आती हैं। नई संपत्तियों की खरीद में भी पुरुषों की भागीदारी अधिक पाई गई, जहां 77 प्रतिशत खरीद पुरुषों द्वारा और केवल 17 प्रतिशत खरीद महिलाओं द्वारा की गई।
32 फीसदी लोगों ने माना पैतृक संपति पर पुत्र का हक
विरासत संबंधी धारणाओं में भी लैंगिक असमानता देखने को मिली। 32 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि पैतृक संपत्ति का मुख्य उत्तराधिकारी पुत्र होना चाहिए, जबकि केवल 13 प्रतिशत ने पुत्रियों को प्राथमिक उत्तराधिकारी माना। अध्ययन में यह भी सामने आया कि परिवार की 63 प्रतिशत संपत्ति पुरुष मुखियाओं के नाम पर है, जबकि विधवा महिलाओं के नाम पर 16 प्रतिशत संपत्ति दर्ज है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी पुरुषों का प्रभाव अधिक पाया गया। 37 प्रतिशत मामलों में पति को परिवार का प्रमुख निर्णयकर्ता माना गया, जबकि केवल 20 प्रतिशत मामलों में पत्नी की स्वतंत्र भूमिका सामने आई। शिक्षा एवं वित्तीय मामलों में संयुक्त निर्णय लेने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक रही।
