May 7, 2026

पोप मुझसे खुश हों या नहीं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं रहेंगे: ट्रंप

वाशिंगटन, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु पोप लियो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी बयानबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल युद्ध पर गहरी चिंता जताते हुए पोप लियो ने इसे पूरी मानवता पर एक कलंक बताया था और तत्काल युद्धविराम की अपील की थी, लेकिन उनके इस बयान के बाद से वह ट्रंप की नजर में चढ़ गए। ट्रंप ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पोप तेहरान द्वारा परमाणु हथियार रखने की क्षमता का समर्थन कर रहे हैं, जबकि वॉशिंगटन इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।

इससे पहले मंगलवार को पोप लियो ने कहा था कि उन्होंने कभी परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं किया और जो लोग उनकी आलोचना करते हैं उन्हें सच बोलना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति के उस टिप्पणी के जवाब में कही, जिसमें उन पर ईरान युद्ध पर अपने रुख से बहुत सारे कैथोलिकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया था।

बुधवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब राष्ट्रपति से पूछा गया कि विदेश सचिव मार्को रुबियो पोप से कल मिलने वाले हैं। ऐसे में आप उन तक कौन सा संदेश पहुंचाने की उम्मीद रखते हैं। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि उनका ईरान पर रुख स्पष्ट है। मैं पोप को खुश करूं या न करूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा कि पोप के बयानों से प्रतीत हुआ कि वह कह रहे थे कि ईरान परमाणु हथियार रख सकते हैं और मैं कहता हूं कि वे नहीं रख सकते। ट्रंप ने कहा कि पोप की संतुष्टि या असंतोष उनके फैसले को प्रभावित नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान के पास परमाणु हथियार होने से वैश्विक स्थिरता को खतरा होगा। अगर ऐसा हुआ, तो पूरी दुनिया बंधक बन जाएगी, और हम इसे होने नहीं देंगे। मेरा केवल यही संदेश है।

दरअसल मार्च में सेंट पीटर्स स्क्वायर में साप्ताहिक एंजेल्स प्रार्थना के दौरान पोप ने कहा था कि हम इतने लोगों के दुख के सामने खामोश नहीं रह सकते, खासकर उन बेबस लोगों के लिए, जो इन संघर्षों के शिकार हुए हैं। उनका दर्द पूरी मानवता का दर्द है। पोप लियो ने कहा कि दुनिया को सिर्फ चिंता जताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

अप्रैल में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध पर पोप की आलोचनाओं के जवाब में पोप को अपराध के मामले में कमजोर और विदेश नीति में बेहद खराब बताया था। उन्होंने कहा था कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो मेरी आलोचना करे और जो चाहता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।

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