September 9, 2026

बांके बिहारी मंदिर में सोने-चांदी से जड़े झूले

मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी चर्चा में

मथुरा में वृंदावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर को भेंट किए गए सोने-चांदी आदि बहुमूल्य रत्न जड़े झूले, रथ एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन आदि सामग्री का विशेष उत्सव एवं पर्वों पर उपयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठे हैं। जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता वाली मंदिर की उच्चाधिकारी प्राप्त समिति की बैठक मंगलवार शाम आयोजित हुई।

इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए मंदिर की उच्चाधिकारी प्राप्त समिति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं नगर आयुक्त की त्रिसदस्यीय समिति गठित की। वृंदावन के लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था।

यह समिति तब से श्रद्धालुओं की सुविधा एवं मंदिर की कुशल व्यवस्था के लिए समय-समय पर बैठक करके आपसी मंत्रणा के आधार पर निर्णय लेती रहती है। मंगलवार को इस समिति की 19वीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में बांकेबिहारी मंदिर को भेंट किए गए श्रृंगार के अनेक बहुमूल्य रत्नों, सोने व चांदी से निर्मित झूले, रथ, नौका एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन का मंदिर की परंपरा के अनुसार विशिष्ट उत्सवों के दौरान सेवा में प्रयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठे।यह सवाल भी किया गया कि आखिर उक्त सामग्री का प्रदर्शन उनके समयानुसार क्यों नहीं कराया गया और वे सब सामान कहां हैं। बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं एवं अन्य आधा दर्जन विषयों पर चर्चा हुई। चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए गए। बताया गया कि कुछ भंडारी एवं अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे।

इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भंडारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। श्रद्धालुओं का चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुरूप भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई। बैठक में मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण के तरीके को लेकर भी सवाल उठे।

अध्यक्ष ने बताया कि यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर में ठाकुर बांकेबिहारी की ओर पेड़े ओर मालाएं फेंकी नहीं जाएंगी। समिति की ओर से प्रसाद को श्रद्धालुओं तक सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। मंदिर में फूलों की सजावट को लेकर भी नई व्यवस्था पर विचार किया गया, लेकिन इस पर सेवायतों ने इन्कार कर दिया। मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी बैठक में चर्चा का अहम विषय रही।

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