September 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में वीडियोग्राफी और एंट्री बैन के खिलाफ याचिका खारिज की

यूट्यूबर्स और इनफ्लुएंसर्स को बड़ा झटका

नई दिल्ली, सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स और बाहरी लोगों की बेरोक-टोक एंट्री और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले राज्य सरकारों के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार द्वारा स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से साफ इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। अदालत के इस कड़े रुख से दोनों राज्यों द्वारा लागू किए गए सख्त दिशा-निर्देश पूरी तरह बरकरार रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि राज्यों द्वारा लगाए गए ये प्रतिबंध नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत मिले मौलिक अधिकारों का सीधा हनन करते हैं। याचिका में यह तर्क भी दिया गया था कि स्वतंत्र दस्तावेजीकरण से स्कूलों में शौचालय, पेयजल, मिड-डे मील और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियां सामने आती हैं, लेकिन अदालत ने इस स्तर पर दखल देने से मना कर दिया।

सरकारी स्कूलों में बाहरी हस्तक्षेप का यह विवाद उस वक्त गरमाया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया गया था। इस मुहिम की आड़ में कई राज्यों के स्कूलों में इनफ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स द्वारा अचानक घुसकर वीडियो बनाने की होड़ मच गई थी। खासकर लखनऊ के एक स्कूल में बिना इजाजत घुसे यूट्यूबर्स द्वारा महिला शिक्षिकाओं पर अनुचित दबाव बनाने और क्लासरूम में बाधा डालने की घटना के बाद शिक्षकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया था।

स्कूलों के शैक्षणिक माहौल, बच्चों की गोपनीयता और शिक्षकों की गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान सरकार ने 16 अगस्त 2026 और उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 अगस्त 2026 को आधिकारिक सर्कुलर जारी किए थे। इन आदेशों के तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति, पत्रकार, यूट्यूबर या सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि के लिए बिना सक्षम शिक्षा अधिकारी की पूर्व अनुमति के स्कूल परिसर में प्रवेश करने, तस्वीरें खींचने, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करने या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब बिना आधिकारिक अनुमति के स्कूलों में घुसने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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