September 19, 2026

सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग प्रशासन पर उठाए सवाल, पहुंची हाईकोर्ट

लगाई तत्काल सुनवाई की गुहार

नई दिल्ली, जाने-माने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार सुबह उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए एक तत्काल सुनवाई की मांग की है। गीतांजलि का कहना है कि उनका सरकारी अस्पताल से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है और वे अपने पति को जल्द से जल्द वहां से किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वांगचुक को मेडिकल देखभाल के नाम पर अस्पताल में ‘अवैध हिरासत’ में रखा जा रहा है।

गीतांजलि आंग्मो ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने परिवार को जानकारी दी थी कि वांगचुक का पोटेशियम लेवल गिरकर 2.9 पर आ गया है, जिसे उन्होंने ‘जानलेवा’ और ‘बेहद खतरनाक’ बताया था। गीतांजलि ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अस्पताल ने अपने पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में इस आंकड़े को छिपा लिया और सिर्फ ‘पोटेशियम लेवल कम होने’ की बात लिखी। उनके मुताबिक, जब 10 घंटे की लगातार गुजारिश के बाद रात 10:30 बजे एक स्वतंत्र लैब से दोबारा ब्लड टेस्ट कराया गया, तो पोटेशियम का स्तर 3.5 निकला, जो पूरी तरह से सामान्य सीमा के भीतर है।

वांगचुक की पत्नी ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल प्रशासन न तो उन्हें डिस्चार्ज कर रहा है और न ही परिवार की पसंद के किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत दे रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के जिस फ्लोर पर वांगचुक को रखा गया है, वहां करीब 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से ज्यादा जवानों का सख्त पहरा है। गीतांजलि ने कहा कि इस भारी पुलिस बल के कारण परिवार की आवाजाही पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है। इसे उन्होंने इलाज नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक ‘अवैध हिरासत’ करार दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से जल्द सुनवाई की गुहार लगाते हुए गीतांजलि ने सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि अगर उनके पति के स्वास्थ्य को कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार और सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों की होगी। उन्होंने अदालत से मांग की है कि वांगचुक की तबीयत और ज्यादा बिगड़ने से पहले उन्हें किसी बेहतर अस्पताल में ले जाने की कानूनी इजाजत दी जाए। गीतांजलि ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के इलाज की जगह चुनने जैसे बुनियादी अधिकार के लिए सिस्टम से इस तरह लड़ने को मजबूर नहीं होना चाहिए।

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