पंजाब निकाय चुनाव: 713 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द
विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप
पंजाब में 26 मई को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग द्वारा नामांकन पत्रों की जांच के दौरान विभिन्न पदों के लिए मैदान में उतरे कुल 713 उम्मीदवारों के पर्चे खारिज कर दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नामांकन रद्द होने पर राज्य के विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि स्क्रूटनी में जानबूझकर उनके उम्मीदवारों को निशाना बनाया गया है। राज्य चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, छंटनी के बाद अब विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 10,096 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सबसे ज्यादा 447 नामांकन उन 75 नगर परिषदों (म्युनिसिपल काउंसिल) के लिए खारिज हुए हैं, जहां चुनाव होने हैं। इसके बाद आठ नगर निगमों (म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) में 151 और 21 नगर पंचायतों में 115 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द किए गए हैं। इन निकाय चुनावों को कुछ ही महीनों बाद होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। यही वजह है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत सभी प्रमुख दल पूरी आक्रामकता के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां अपने आधिकारिक चुनाव चिह्नों का इस्तेमाल कर मैदान में उतरी हैं।
आमतौर पर शहरी स्थानीय चुनावों में नागरिक सुविधाएं और स्थानीय विकास मुख्य मुद्दा होते हैं, लेकिन इस बार ये आम मुद्दे पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। नगर निकायों के पास धन की कमी के कारण खस्ताहाल हुए शहरी बुनियादी ढांचे का मुद्दा तो है ही, लेकिन चुनावी अखाड़े में इस बार कानून-व्यवस्था की स्थिति, अवैध नशे का बढ़ता जाल, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी जैसे बड़े मुद्दे पूरी तरह से हावी हो चुके हैं।
