July 16, 2026

अब देश में नहीं बिकेगा जबरन मजदूरी से बना विदेशी सामान

भारत ने रातों-रात बदली व्यापार नीति

नई दिल्ली, विदेशी कंपनियां अब तक सस्ते माल के दम पर भारतीय बाजारों में धड़ल्ले से अपना दबदबा बनाती आई हैं, लेकिन अब उनके इस खेल पर पूरी तरह लगाम लगने वाली है। भारत सरकार ने एक ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है, जिसमें मजदूरों का खून-पसीना चूसकर बनाया गया विदेशी सामान अब भारत की सीमा में घुस भी नहीं पाएगा। भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी से तैयार होने वाले उत्पादों के आयात पर सख्त पाबंदी लगाने का कानूनी हथियार तैयार कर लिया है। इस बड़े फैसले से भारत ने दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि वह व्यापार के साथ-साथ मानवाधिकारों और पारदर्शी सप्लाई चेन से कोई समझौता नहीं करेगा।

सरकार की इस नई अधिसूचना के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय की शक्तियों को और भी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। विदेश व्यापार नीति में जोड़े गए नए पैरा 2.20B के अनुसार, अगर अब किसी भी विदेशी प्रोडक्ट के निर्माण में आंशिक या पूरी तरह से जबरन मजदूरी कराए जाने के सुबूत मिलते हैं, तो केंद्र सरकार उस प्रोडक्ट को ब्लैकलिस्ट करके उसके आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकती है। इस पूरे मामले में जांच की जिम्मेदारी सीधे तौर पर डीजीएफटी के कंधों पर होगी और आगे की पूरी कानूनी कार्रवाई तय नियमावली के तहत ही पूरी की जाएगी।

इस नए कानून की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली बार ‘फोर्स्ड लेबर’ को स्पष्ट और आधिकारिक रूप से परिभाषित किया गया है। नई नीति के पैरा 11.64 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के कंवेंशन का साफ तौर पर हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर किसी भी मजदूर या व्यक्ति से डरा-धमकाकर, किसी सजा का खौफ दिखाकर या उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती काम लिया जाता है, तो उसे जबरन मजदूरी की श्रेणी में रखा जाएगा। इस सटीक परिभाषा के जुड़ने से भविष्य में ऐसे मामलों को पकड़ने और उन पर कड़ा कानूनी चाबुक चलाने में काफी आसानी होगी।

सरकार ने अपनी इस अधिसूचना में सीधे तौर पर किसी भी देश या कंपनी का नाम नहीं लिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर चीन जैसे देशों के एक्सपोर्ट पर पड़ेगा। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के शिनजियांग प्रांत को लेकर अक्सर तीखी बहस होती रही है। अमेरिका और तमाम मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि वहां उइगर मुसलमानों से जबरन मजदूरी कराकर फैक्ट्रियों में सामान बनवाया जाता है। इस अमानवीय कृत्य को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ पहले ही अपने यहां ऐसे उत्पादों की एंट्री पर कड़े नियम लागू कर चुके हैं और अब भारत ने भी यह सख्त रुख अपना लिया है।

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