एचपी-शिवा परियोजना से ऊना के किसानों की बदल रही तस्वीर, बागवानी बन रही बेहतर आजीविका का माध्यम
सौर फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक से ऊना में साकार हो रही समृद्ध बागवानी की नई तस्वीर
रजनी,ऊना, ऊना ज़िला में बागवानी की तस्वीर तेजी से बदल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कृषि और बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच एचपी-शिवा परियोजना किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। जंगली जानवरों के आतंक और सिंचाई की कमी से जूझने वाले क्षेत्रों में अब सौर फेंसिंग, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के सहारे फलदार बाग विकसित हो रहे हैं। इससे किसान व्यावसायिक बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं और उनकी आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
बंगाणा उपमंडल के बौल गांव के 65 वर्षीय किसान अजमेर सिंह एचपी-शिवा परियोजना की सफलता की जीवंत मिसाल हैं। परियोजना के तहत भूमि समतलीकरण, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी सहयोग मिलने के बाद उन्होंने 25 कनाल भूमि पर श्वेता और ललिता किस्म के अमरूद के पौधों से बागवानी की शुरुआत की। बेहतर परिणाम मिलने पर उन्होंने अपने बगीचे का लगातार विस्तार किया और आज लगभग 125 कनाल भूमि पर अमरूद की सफल खेती कर रहे हैं। पिछले वर्ष उनके बगीचे से लगभग 25 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हुआ, जिससे करीब 1.25 लाख रुपये की आय हुई। उत्पादन लागत के बाद लगभग 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर उन्होंने यह साबित किया कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
अजमेर सिंह की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
साथ ही, चंगर-हंडोला के सुनील कुमार ने परियोजना के तहत 25 कनाल भूमि पर 1,725 अमरूद के पौधों का आधुनिक बगीचा विकसित किया है।
वहीं, उपरली बॉल गांव के 74 वर्षीय रोशन लाल ने ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसल को अपनाते हुए 25 कनाल भूमि पर ताइवान पिंक वैरायटी के लगभग 3,300 पौधे लगाए हैं। इन किसानों की उपलब्धियां दर्शाती हैं कि एचपी-शिवा परियोजना ऊना में बागवानी को नई पहचान देने के साथ किसानों के लिए आय और आत्मविश्वास का नया आधार भी बन रही है।
दो चरणों में हो रहा है परियोजना का क्रियान्वयन
उद्योग विभाग के उप निदेशक केके भारद्वाज ने बताया कि एचपी-शिवा परियोजना को जिला ऊना में दो चरणों में लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण के अंतर्गत जिले में 200 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक फल बागवानी विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि दूसरे चरण में 300 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रकार कुल 500 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक फल उत्पादन विकसित करने की योजना बनाई गई है।
प्रथम चरण में उल्लेखनीय उपलब्धियां
श्री भारद्वाज ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में अब तक 149 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जा चुका है। इस चयनित क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पौधरोपण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
अब तक लगभग 30 हजार मीटर (30 किलोमीटर) लंबी सौर ऊर्जा आधारित फेंसिंग स्थापित की जा चुकी है, जिससे किसानों की फसलें जंगली जानवरों से सुरक्षित हो रही हैं।
इसके अतिरिक्त लगभग 13 लाख लीटर क्षमता के अत्याधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड मॉड्यूलर जल टैंक बनाए गए हैं तथा आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे सीमित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। इन सभी व्यवस्थाओं के उपरांत लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र में 65,575 उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। इन पौधों में मुख्य रूप से अमरूद, मुसम्मी एवं अनार शामिल हैं।
13 क्लस्टरों में विकसित हो रही आधुनिक फल बागवानी
उप निदेशक ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत जिला ऊना में कुल 13 क्लस्टरों का चयन किया गया है। इनमें विकास खंड बंगाणा के अंतर्गत डुमखर, नलवाड़ी, बौल, सन्हाल, टीहरा, मुच्छाली, चड़ोली, कुवाड़ी, हंडोला, लमलेहडी तथा डोहक सहित लगभग 140 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। वहीं विकास खंड हरोली के नंगल खुर्द में लगभग 4 हेक्टेयर तथा विकास खंड गगरेट के सलोह बेरी में लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
