July 11, 2026

पंजाब कांग्रेस में बढ़ा टूट का खतरा, सांसद बोले- कंप्रोमाइज्ड नेता नहीं चाहिए

अब हाईकमान को रिपोर्ट देंगे प्रभारी

चंडीगढ़, वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान अभी पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव भूपेश बघेल ने शनिवार को पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बैठक कर उनके मन की बात सुनी और संगठन में एकजुटता बनाए रखने का भरोसा दिलाया।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी हाईकमान के निर्णयों पर किसी को आपत्ति नहीं है, हालांकि कुछ मुद्दों पर नेताओं ने अपनी चिंताएं जरूर साझा की हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश प्रभारी होने के नाते मैं सभी साथियों के हितों का पूरा ध्यान रखूंगा। जो नेता चुनाव जीतने की क्षमता रखता होगा, उसे टिकट देने पर विचार किया जाएगा। किसी भी कार्यकर्ता या नेता को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि संगठन में उसकी अनदेखी होगी।” बघेल ने कहा कि वह बैठक की पूरी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे।

बैठक में शामिल सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि उन्होंने अपनी बात प्रदेश प्रभारी के सामने रख दी है। उन्होंने कहा कि कई बार पार्टी को अपने फैसलों पर पुनर्विचार भी करना पड़ता है। पंजाब कांग्रेस को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो मजबूती से अपनी बात रख सके, न कि समझौता करने वाला नेतृत्व।

बैठक से पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता चंडीगढ़ पहुंचे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने सीमित प्रतिनिधिमंडल को बुलाया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने शक्ति प्रदर्शन का संदेश दिया। चन्नी गुट ने एक बार फिर मांग दोहराई कि यदि उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो कम से कम वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए, ताकि पार्टी उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ सके। बैठक से पहले चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा था कि सभी मुद्दों पर अंदर चर्चा होगी और उसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग इस बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक विवादों में प्रदेश प्रभारी मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं और हर बैठक में प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी आवश्यक नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और संवाद की प्रक्रिया संगठन को मजबूत बनाने के लिए हो रही है।

इसी बीच राजा वड़िंग के समर्थक और पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा- जंगल में जानवर कई हो सकते हैं, लेकिन शेर एक ही होता है और वही पूरे जंगल पर राज करता है। राजनीतिक हलकों में इस पोस्ट को कांग्रेस की आंतरिक सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि सभी मतभेद बातचीत के जरिए सुलझाए जाएंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव संगठनात्मक एकजुटता के साथ लड़े जाएंगे

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