May 19, 2026

अमेरिका ने भारत को 428 मिलियन डॉलर की मिलिट्री सेल्स को दी मंजूरी

वाशिंगटन, अमेरिका ने भारत के लिए दो संभावित फॉरेन मिलिट्री सेल्स को मंजूरी दी है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 428.2 मिलियन डॉलर है। इन सौदों में एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए फॉलो-ऑन सपोर्ट सेवाएं और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव से जुड़ी सहायता शामिल है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 मई को कांग्रेस को भेजी गई दो अलग-अलग सूचनाओं में यह जानकारी दी। इनमें से बड़ा सौदा एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के दीर्घकालिक रखरखाव और सपोर्ट से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत 230 मिलियन डॉलर है।
विदेश विभाग की सूचना में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत सरकार को एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर के लिए सस्टेनमेंट सपोर्ट उपलब्ध कराने वाली संभावित फॉरेन मिलिट्री सेल्स को मंजूरी देने का फैसला किया है।
अमेरिका के मुताबिक, भारत ने एम777ए2 तोपों के लिए दीर्घकालिक तकनीकी और रखरखाव सहायता मांगी है। इस पैकेज में अतिरिक्त उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और वापसी सेवाएं, ट्रेनिंग, तकनीकी सहायता, फील्ड सर्विस प्रतिनिधि, डिपो क्षमता तथा लॉजिस्टिक्स और प्रोग्राम सपोर्ट से जुड़ी अन्य सेवाएं शामिल हैं।
इस पैकेज का मुख्य कॉन्ट्रैक्टर बीएई सिस्टम्स होगा।
एक दूसरी सूचना में विदेश विभाग ने अपाचे हेलिकॉप्टरों से जुड़ी लगभग 198.2 मिलियन डॉलर की संभावित डील को भी मंजूरी दी।
बयान में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत सरकार के लिए अपाचे हेलिकॉप्टर की फॉलो-ऑन सपोर्ट सर्विस और उससे जुड़े उपकरणों की खरीद को मंजूरी देने का फैसला किया है।
भारत ने एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए मेंटेनेंस सपोर्ट, अमेरिकी सरकार और कंपनियों की इंजीनियरिंग, तकनीकी तथा लॉजिस्टिक सहायता सेवाएं, तकनीकी दस्तावेज, प्रशिक्षण और अन्य संबंधित सपोर्ट सेवाएं मांगी हैं।
इस अपाचे पैकेज के मुख्य कॉन्ट्रैक्टर बोइंग और लॉकहीड मार्टिन होंगे।
दोनों सूचनाओं में कहा गया कि ये बिक्री इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका के व्यापक रणनीतिक उद्देश्यों को मजबूत करने में मदद करेगी।
विदेश विभाग ने दोनों बयानों में लगभग एक जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों को समर्थन देगी। इससे अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे तथा भारत जैसे प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, जो इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अमेरिका ने कहा कि इन सौदों से भारत की मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी, देश की सुरक्षा मजबूत होगी और क्षेत्रीय खतरों को रोकने में मदद मिलेगी।

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