महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने परखा हस्तशिल्प का हुनर
जिला कारागार का न्यायिक अधिकारियों ने किया दौरा, महिला कैदियों की सुनीं कानूनी समस्याएं
नारनौल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष डॉ. रितु वाई.के. बहल ने आज जिला कारागार का दौरा किया। इस मौके पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव नीलम कुमारी भी मौजूद थी।
इस दौरान उन्होंने वहां महिला बंदियों के लिए रिचा क्राफ्ट अटेली के सहयोग से चलाए जा रहे एक महीने के हस्तशिल्प कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का बारीकी से निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
इस दौरे के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला बंदियों और उन्हें सिखाने वाले शिक्षकों से सीधा संवाद किया।
उन्होंने महिलाओं द्वारा प्रशिक्षण के दौरान तैयार की गई सुंदर और कलात्मक हस्तशिल्प की वस्तुओं को देखा। महिला बंदियों की कला, रचनात्मकता और लगन को देखकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी कला की सराहना की।
उन्होंने बंदियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कारागार में सीखा गया यह हुनर भविष्य में उनके मान-सम्मान और पुनर्वास के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।
कारागार परिसर के निरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने वहां रह रहे बंदियों की रहन-सहन की व्यवस्थाओं को भी देखा। इसके साथ ही उन्होंने महिला बंदियों की कानूनी अड़चनों और समस्याओं को सुना तथा उनके त्वरित समाधान के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बंदियों में कौशल का विकास करना है ताकि कारागार से बाहर आने के बाद वे समाज में सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
