July 5, 2026

जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूल की किताबों पर में आतंकी हाफिज सईद और मकबूल भट को बताया महान हस्ती

पब्लिशर पर यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो किताबों को लेकर घाटी से लेकर जम्मू तक एक बड़ा सियासी और सुरक्षा विवाद खड़ा हो गया है। इन किताबों में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े चेहरों और अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसके बाद पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन दो किताबों को लेकर उठा बवंडर जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस गंभीर लापरवाही को उजागर किया गया था। विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से दो पुस्तकें हैं:
‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके’ – लेखक: हिलाल अहमद और संतोष मीना (पब्लिशर: ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू).
‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’ – लेखक: सुशांत गिरी (पब्लिशर: अनुराग प्रकाशन, दिल्ली)।
इन किताबों में पाकिस्तान समर्थित अलगाववादी नेता मकबूल भट (जेकेएलएफ के सह-संस्थापक, जिसे 1984 में तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी) को शहीद’म, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक को देश और राज्य का प्रभावशाली व्यक्तित्व और आखिरी उम्मीद के रूप में पेश किया गया है।

हैरानी की बात यह है कि इन विवादित किताबों का चयन जम्मू-कश्मीर के विशेषज्ञों की 4 समितियों ने 364 पब्लिशर्स की स्क्रूटनी करने के बाद किया था. राज्य के 1,832 सरकारी और 394 पीएम श्री स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत यह खरीद हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, विवाद सामने आने से पहले एक किताब की 123 कॉपियां जम्मू, रामबन और उधमपुर में तथा दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के स्कूलों में वितरित भी की जा चुकी थीं।

मामला तूल पकड़ते ही राज्य सरकार और शिक्षा विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। शिक्षा विभाग ने वितरित की गईं सभी विवादित प्रतियों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार ने इन किताबों के लेखकों और दोनों पब्लिशर्स को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट कर दिया है. उनकी अन्य सभी छपी हुई सामग्री भी वापस ली जा रही है।
इस गंभीर लापरवाही की जांच के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों की समिति नियुक्त की गई है, जिन्हें 30 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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