June 25, 2026

मत्स्य एवं झींगा पालन से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में रोहतक प्रशासन के प्रभावी प्रयास

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मत्स्य एवं झींगा पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को स्वरोजगार एवं आय वृद्धि के नए अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

रोहतक में मत्स्य एवं झींगा पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य एवं एक्वाकल्चर गतिविधियों से जोड़कर कृषि विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जिले की उपलब्धियां
1,385 एकड़ क्षेत्र में मत्स्य पालन
105 लाख मछली बीज का संचयन
वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में 807 मीट्रिक टन मछली उत्पादन
92.5 एकड़ क्षेत्र में झींगा पालन
368 सक्रिय मत्स्य पालक एवं 41 झींगा पालक
654 तालाबों में मत्स्य एवं झींगा उत्पादन गतिविधियां

आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा
जिले में दो अत्याधुनिक 25-टैंक क्षमता वाले बायोफ्लॉक यूनिट स्थापित किए गए हैं। किसानों को केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), लाहली तथा एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ रहे किसान
रोहतक में उत्पादित झींगा को आंध्र प्रदेश एवं गुजरात की प्रोसेसिंग कंपनियां सीधे तालाब स्थल से खरीद रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध हो रहा है।

सरकारी योजनाओं का लाभ
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), सघन मत्स्य विकास कार्यक्रम तथा अनुसूचित जाति परिवार कल्याण योजना के तहत किसानों को नए तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, आरएएस यूनिट, फिश कियोस्क, फीड मिल एवं अन्य परियोजनाओं पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40% तक अनुदान
महिला एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 60% तक अनुदान

जलभराव एवं लवणीय भूमि में भी अवसर
जिला प्रशासन द्वारा जलभराव एवं लवणीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता शिविर, प्रचार अभियान एवं भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी व्यवसाय से जुड़ सकें।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि आधुनिक तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान मत्स्य एवं झींगा पालन के माध्यम से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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