June 23, 2026

भारत-ब्रिटेन एफटीए से किसानों, मछुआरों और एमएसएमई को होगा बड़ा फायदा: पीयूष गोयल

नई दिल्ली, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) वास्तव में लोगों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया समझौता है, जिससे भारतीय किसानों, कारोबारियों, कारीगरों और देश भर के आम लोगों को लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ब्रिटेन के प्रीमियम बाजार तक पहुंच मिलने से महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खुलेंगे। साथ ही यह समझौता भारत के मूल हितों से समझौता किए बिना वंचित वर्गों को भी सशक्त बनाएगा।” पीयूष गोयल ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने में मदद करेगा। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आम लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।

उन्होंने अपने एक विस्तृत लेख में बताया कि 15 जुलाई से लागू होने वाला यह परिवर्तनकारी और दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौता भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में व्यापक पहुंच प्रदान करेगा, खासकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में। इसके तहत लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क तुरंत समाप्त कर दिया जाएगा, जो लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करता है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में सीईटीए पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने वाला है। इसके तहत किसानों को प्रीमियम निर्यात बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जबकि उनके घरेलू हितों की भी सुरक्षा की जाएगी। मछुआरों को ब्रिटेन के विशाल बाजार में समुद्री उत्पादों के निर्यात का लाभ मिलेगा। श्रमिकों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को वैश्विक वैल्यू चेन तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं पेशेवरों को भी अधिक गतिशीलता और पहचान के अवसर प्राप्त होंगे।

मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों को ब्रिटेन के बाजार में ऐसे लाभ देगा, जो कई मामलों में यूरोपीय देशों को मिलने वाले लाभों के बराबर या उससे अधिक होंगे।

हल्दी, काली मिर्च, इलायची और आम का गूदा, अचार तथा दालों जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों को यूके में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा प्रमाणन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारत के सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को बाहर रखा गया है ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), सेब, ओट्स और खाद्य तेल जैसे क्षेत्रों को समझौते में शामिल नहीं किया गया है। यह सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, घरेलू मूल्य स्थिरता और कमजोर किसान समुदायों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यूके के विशाल बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे पारंपरिक कारीगरों, बड़े कारखानों और क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *