भारतीय स्टेट बैंक ने जिला पुस्तकालय को दी साइकिल स्टैंड और वाटर कूलर की सौगात
नारनौल, जिला पुस्तकालय के सामने स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा ने अपने सामाजिक सरोकारों तथा उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए आज जिला पुस्तकालय को एक साइकिल स्टैंड और वाटर कूलर भेंट किया। इसका लोकार्पण एसबीआई के मुख्य प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि एसबीआई हमेशा से ही बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के कार्यों में अग्रणी रहा है। श्री सिंह ने बताया कि यह संपूर्ण कार्य बैंक के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अर्थात सीएसआर के तहत जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर किया गया है। पुस्तकालय में आने वाले पाठकों और विद्यार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बैंक प्रबंधन द्वारा इस बुनियादी आवश्यकता को पूरा किया गया है, जिससे अब यहां आने वाले लोगों को शीतल जल के साथ-साथ अपने वाहनों को सुरक्षित खड़ा करने की उत्तम सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने विश्वास जताया है कि स्टेट बैंक का यह प्रयास स्थानीय नागरिकों और छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा तथा बैंक भविष्य में भी समाज हित के ऐसे कार्यों के लिए निरंतर समर्पित रहेगा।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों जब वह पुस्तकालय में गए तो उन्होंने वहां पर मौजूद विद्यार्थियों से बातचीत की विद्यार्थियों ने यहां इन चीजों की कमी बताई। इस पर बैंक प्रबंधन ने तुरंत जिला पुस्तकालय को यह सौगात देने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य प्रबंधक देवेंद्र सिंह ने जीवन में आत्मविश्वास और अनुशासन के मूल मंत्र को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने पुस्तकालय की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यहां गैर-शैक्षणिक गतिविधियां फैलाना एक तरह का प्रदूषण है, इसलिए छात्रों को परिसर में मोबाइल का उपयोग न करने तथा केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि पुस्तकालय को हर महीने एक उपयोगी पुस्तक दान की जाएगी तथा यहां बेहतर प्रदर्शन करने वाले सफल पाठकों के नाम का बोर्ड भी लगाया जाएगा, जो पुस्तकालय की असली धरोहर हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजवीर सिंह ने मूल्य आधारित शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के अध्ययन के साथ-साथ हमें अपने राष्ट्रीय नायकों और महापुरुषों की जीवनियों व पुस्तकों को भी अवश्य पढ़ना चाहिए।
