अश्वगंधा की पत्तियां नहीं, सिर्फ जड़ है सुरक्षित: आयुष मंत्रालय
अश्वगंधा को भारत की सबसे पुरानी और भरोसेमंद जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है। आमतौर पर लोग इसका इस्तेमाल तनाव कम करने, नींद बेहतर करने और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन इसके उपयोग को लेकर अब एक बेहद जरूरी जानकारी सामने आई है, जिसे समझना हर किसी के लिए आवश्यक है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अश्वगंधा की केवल जड़ और उसके एक्सट्रैक्ट का ही उपयोग सुरक्षित माना गया है। इसके पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल न तो परंपरागत रूप से उचित माना गया है और न ही वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित पाया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कई उत्पादों में पत्तियों का उपयोग किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी कारण आयुष मंत्रालय और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने मिलकर यह नियम तय किया है कि केवल जड़ और उसके मानक एक्सट्रैक्ट का ही उपयोग किया जाए। अश्वगंधा की जड़ को इसका सबसे अधिक औषधीय गुणों वाला हिस्सा माना जाता है। सदियों से इसका उपयोग शरीर की कमजोरी दूर करने, तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। आधुनिक शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि इसकी जड़ में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को तनाव से लड़ने में मदद करते हैं। कई लोग इसका सेवन नींद की गुणवत्ता सुधारने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक थकान कम करने के लिए भी करते हैं।
हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब लोग इसके बारे में पूरी जानकारी के बिना इसके किसी भी हिस्से का इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अश्वगंधा सप्लीमेंट या पाउडर का सेवन कर रहा है, तो उसे यह जरूर जांचना चाहिए कि उसमें केवल रूट एक्सट्रैक्ट हो और पत्तियों का मिश्रण न हो। गलत हिस्सों के इस्तेमाल से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं और इसका पूरा लाभ भी नहीं मिल पाता।
दुनियाभर में अश्वगंधा पर लगातार शोध हो रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि सही तरीके और उचित मात्रा में इस्तेमाल करने पर यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, ऊर्जा स्तर और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर जड़ी-बूटी की तरह इसका सही रूप और संतुलित मात्रा में उपयोग बेहद जरूरी है।
सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएं लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं, ताकि हर्बल उत्पाद सुरक्षित और प्रमाणित बने रहें। इसलिए उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी सामग्री जरूर जांच लेनी चाहिए।
