नगर निगम के महापौर ओर उपमहापौर के चुनाव में विधायकों को मतदान का अधिकार देने का क्या औचित्य ?
- प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल जी
पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
रजनीश
हमीरपुर
कई बार क्षणिक लाभ के लिए हम ऐसे निर्णय ले लेते हैं जिनके परिणाम दूरगामी होते हैं और इसके कारण या तो बाद मैं निर्णय बदलना पड़ता है या ऐसे निर्णय का दुष्प्रभाव का सारि व्यवस्था पर असर पड़ता है हाल ही मैं हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसमे लगता है कि शायद उसके दूरगामी प्रभावों पर विचार नही किया गया है । इस निर्णय के अनुसार नगर निगमों के महापौर और उपमहापौर के चुनाव मे स्थानीय विधायको को भाग लेने और मतदान करने का अधिकार दिया गया है ।शायद ये निर्णय कानून की कसौटी पर सही नही उतरेगा । इस निर्णय के परिणाम स्वरूप यदि महापौर ओर उपमहापौर के चुनाव मे विधायको को मतदान का अधिकार होगा तो फिर क्या जब नगर परिषदों , नगर पंचायतों , जिला परिषदों , पनचायत समितियों के अध्यक्ष और उपअध्यक्ष का चुनाव होगा तो उसमें भी विधायकों को मतदान का अधिकार होगा ? क्या विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक को विधानसभा के अतिरिक्त स्थानीय निकायों ओर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में मतदान का अधिकार मिल जाएगा ? इसी के आधार पर सांसदों को यह अधिकार होगा कि उनके चुनाव क्षेत्र में आने वाले सभी नगर निगमों , नगर परिषदों ,नगर पंचायतों, जिला परिषदों , पंचायत समितियों के अध्यक्ष और उपअध्यक्ष के चुनाव में सांसद भी अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे। फिर मामला केवल पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के मुखिया चुनने तक ही सीमित नही होगा फिर सांसद को अपने राज्य में मुख्य मन्त्री के चुनाव में मतदान करने का अधिकार मंगमे से कैसे रोका जा सकेगा और यह प्रशन केवल एक राज्य तक सीमित नही होगा , राष्ट्रीय स्तर पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इस लिए मैंने कहा कि क्षणिक लाभ के लिए दूरगामी परिणामों वाले निर्णय लेंने मैं पूरा विचार विमर्श होना चाहिये । एक दो नगर निगमों के महापौर ओर उपमहापौर के चुनाव के लालच के साथ साथ प्रदेश व्यापी ओर राष्ट्रव्यापी परिणामों को भी ध्यान में रखना चाहिए । ऐसे निर्णय तर्कसंगत नहीं होते , संविधान निर्माताओं ने इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री का चुनाव करने का अधिकार केंद्र में केवल लोकसभा के सांसदों के दिया है , राज्य सभा के सांसदों को यह अधिकार नही है। इसी प्रकार प्रदेश सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री विधानसभा के विधायक चुनते हैं , विधान परिषद सदस्यों को यह अधिकार नही है । इसलिए नए आदेशानुसार चुने गए महापौर ओर उपमहापौर का चयन क्या कानून की कसौटी पर न्यायालय में टिक पायेगा ? यह महत्वपूर्ण प्रशन रहेगा ।
प्रेम कुमार धूमल
पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश
