May 3, 2026

युद्ध चाहते हो या शांति, फैसला तुमको करना है: काजेम गरीबाबादी

ईरान का अमेरिका को सख्त संदेश

नई दिल्ली, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए शांति प्रस्ताव को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेतों के बाद मध्य पूर्व की कूटनीति एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अगला कदम पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर करता है—चाहे वह बातचीत का रास्ता चुने या टकराव का।

तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि उनका देश कूटनीतिक समाधान और संघर्ष—दोनों स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है।

शनिवार को एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन इसकी सफलता को लेकर उन्हें गंभीर संदेह है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अब तक “पर्याप्त कीमत” नहीं चुकाई है। बाद में सोशल मीडिया पर ट्रंप ने और कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि पिछले दशकों में ईरान के आचरण को देखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना संभव नहीं लगता।

ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसियों के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में हालिया संघर्षों के बाद अस्थाई युद्धविराम लागू है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

वाशिंगटन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना ठोस परमाणु समझौते के किसी भी स्थाई शांति की संभावना नहीं है। वहीं ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं—

क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में कमी
होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंधों और नाकाबंदी का अंत,
ईरानी संपत्तियों की रिहाई और मुआवजा
आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना,
लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष का अंत
होर्मुज क्षेत्र के लिए नया नियंत्रण तंत्र।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु मुद्दे के पूर्ण समाधान से पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का संकेत दे रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

इस बीच, फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका सभी विकल्पों पर विचार करेगा।

साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने शिपिंग कंपनियों को सख्त चेतावनी जारी की है कि होर्मुज मार्ग की सुरक्षा के नाम पर ईरान को किसी भी प्रकार का भुगतान—चाहे नकद हो या डिजिटल—करने पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मौजूदा हालात में साफ है कि कूटनीति और टकराव के बीच संतुलन बेहद नाजुक हो गया है। आने वाले दिनों में अमेरिका का रुख इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *