February 12, 2026

गुजरात में लागू होगा यूसीसी: भूपेंद्र पटेल

रिटायर्ड न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित

गांधीनगर: उत्तराखंड में यूसीसी के लागू होने के बाद अब गुजरात सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर राज्य में समिति का गठन किया है। गुजरात सरकार ने मंगलवार को घोषणा की है कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने और कानून बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित की गई है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करने के लिए गुजरात सरकार हमेशा प्रतिबद्ध रही है। इसी दिशा में गुजरात सरकार आगे बढ़ रही है। सभी नागरिकों को समान हक मिले, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति के गठन का फैसला किया गया है। यह समिति 45 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर सरकार निर्णय लेगी।

सीएम पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “हम संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने देश में नागरिकों के समान हक के लिए कॉमन सिविल कोड पर अमल करने का फैसला लिया है। भाजपा ने आर्टिकल 370 हो या वन नेशन, वन इलेक्शन, ट्रिपल तलाक कानून जैसे वादों को पूरा किया है। इसी सिलसिले में आज गुजरात सरकार ने कॉमन सिविल कोड के लिए एक समिति का गठन किया है।”

उन्होंने कहा कि इस समिति में रंजना देसाई के अलावा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सीएल मीणा, वकील आरसी कोडेकर, पूर्व कुलपति दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल हैं।

वहीं, गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई करेंगी। सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीएल मीणा, अधिवक्ता आरसी कोडेकर, पूर्व कुलपति दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ भी इस समिति का हिस्सा होंगे। मुख्यमंत्री ने इस समिति को अगले 45 दिनों में इस पर विस्तृत शोध करने और सरकार को एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में लागू हुआ यूसीसी कानून देश के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। यूसीसी के नियम में आदिवासी समाज के रीति-रिवाज का संरक्षण किया जाएगा। यह समिति सभी धर्मों के गुरु से चर्चा करने के बाद ही रिपोर्ट बनाएगी। उत्तराखंड का मॉडल एक श्रेष्ठ मॉडल है, समिति डिटेल में रिसर्च करने के बाद ही सरकार को रिपोर्ट पेश करेगी।

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