April 29, 2026

मालदा कांड का मास्टरमाइंड बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार

यहीं से था भागने का प्लान

मालदा, पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और भीषण हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। इस पूरे खौफनाक कांड के मास्टरमाइंड माने जा रहे वकील मोफक्कारुल इस्लाम को बंगाल पुलिस ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, मोफक्कारुल गिरफ्तारी से बचने के लिए राज्य छोड़कर भागने की पूरी तैयारी में था। पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि वह बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है। इसके बाद बंगाल पुलिस की टीम ने तुरंत जाल बिछाकर उसे एयरपोर्ट परिसर से ही दबोच लिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कालियाचक में उग्र भीड़ को भड़काने और सरकारी काम में बाधा डालने के पीछे मोफक्कारुल का ही दिमाग था। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब आज ही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की टीम मालदा पहुंचकर इस मामले की जांच अपने हाथों में लेने वाली है।
इस संवेदनशील मामले में मालदा पुलिस ने लगातार छापेमारी करते हुए अब तक इंडियन सेकुलर फ्रंट के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उनके पास इन सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं। गुरुवार को इन सभी 17 आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में इस हिंसक साजिश की कई और गहरी परतें खुलेंगी।
गिरफ्तारी के बाद आईएसएफ उम्मीदवार शाहजहां अली ने पुलिस के सभी दावों को खारिज करते हुए खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। कोर्ट ले जाते समय मीडिया से बातचीत में शाहजहां ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है और बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि जिस वक्त यह घटना हुई, वह वहां मौजूद ही नहीं थे बल्कि एक धार्मिक कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे। हालांकि, पुलिस ने उनके दावों को सिरे से नकारते हुए कहा है कि इस घटना में उनकी संलिप्तता के तकनीकी और चश्मदीदों के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
गौरतलब है कि यह पूरा बवाल बीते बुधवार को शुरू हुआ था जब कालियाचक में एसआईआर (SIR) का काम चल रहा था। वोटर लिस्ट से कुछ लोगों के नाम हटाए जाने की बात फैलते ही भीड़ उग्र हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक ऑफिस को घेर लिया और तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान इन अधिकारियों को न तो खाना दिया गया और न ही पानी।
इस खौफनाक घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए इसे न्याय प्रशासन के काम में बाधा डालने की एक ढीठ कोशिश करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले की जांच तुरंत एनआईए (NIA) को सौंप दी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने इलाके में बिना अनुमति के किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा होने या जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। वहीं, कोर्ट ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव और डीजीपी को भी नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है।

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