जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
रखीं ये 3 बड़ी मांगें
नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच हुई एक अहम बैठक के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। वांगचुक के साथ इस लंबे अनशन में आइसा के तीन सदस्य समेत कई अन्य लोग भी डटे हुए थे। सीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार की तरफ से बातचीत की सकारात्मक पहल होने के बाद ही अनशन को खत्म करने का यह फैसला लिया गया है।
इस आंदोलन और अनशन के खत्म होने की पटकथा एक दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी। दरअसल, रविवार को सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर राजनीतिक दल संसद के आगामी मानसून सत्र में शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठाने का भरोसा दिलाते हैं, तो वांगचुक अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया था कि वांगचुक की दिली ख्वाहिश है कि उनका चलो संसद मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़े।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह की इस कोशिश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीजेपी नेताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) के साथ हुई मुलाकात की तस्वीर साझा की। नड्डा ने लिखा कि सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव आया था, जिसके बाद 11:50 बजे से ही उनके साथ बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत शुरू हुई। पहले प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तार से मौखिक चर्चा की गई और फिर शाम करीब 4 बजे उन्होंने अपनी मांगों की लिखित याचिका सरकार को सौंपी।
सीजेपी की तरफ से सरकार और जेपी नड्डा के सामने तीन प्रमुख और बड़ी मांगें रखी गई हैं। इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत प्रभाव से इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिजनों को उचित मुआवजा और सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग शामिल है। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वह इन मांगों पर उचित स्तर पर चर्चा करेंगे। हालांकि, दास ने अपने बयान में कड़े तेवर दिखाते हुए साफ किया है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई पक्का वादा नहीं किया गया है, और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोग बिल्कुल भी चैन से नहीं बैठेंगे।
