जल्द 4 रुपए तक सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वेस्ट एशिया में तनाव के दौरान 52 हफ्तों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला कच्चा तेल अब 40 फीसदी से ज्यादा सस्ता हो चुका है और इसकी कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है। इस बीच, भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी ने पेट्रोल और डीजल के दाम घटाकर ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है, लेकिन सरकारी पेट्रोल पंपों पर अभी भी आम जनता को इस कटौती के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
देशभर में 7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंप चलाने वाली प्राइवेट कंपनी नयारा एनर्जी पिछले दो सालों में फ्यूल के दाम कम करने वाली पहली कंपनी बन गई है। कंपनी ने 1 जुलाई से पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की है। इसके साथ ही मार्च में की गई बढ़ोतरी को वापस ले लिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भी करीब 173 से 184 रुपये तक की कमी की गई है। हालांकि, देश के 90 फीसदी से ज्यादा पंप चलाने वाली सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपनी कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं किया है और न ही घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटाए गए हैं।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के सस्ते होने के बावजूद भारत में तुरंत इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें रिफाइनिंग कॉस्ट, ढुलाई, टैक्स और कंपनियों का कमीशन भी शामिल होता है। भारतीय कंपनियां हफ्तों पहले तेल खरीदती हैं, इसलिए रिफाइनरियों में अभी भी पहले का खरीदा गया महंगा तेल इस्तेमाल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल में आई इस गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में अभी दो से चार हफ्ते का समय लग सकता है। अगर हालात स्थिर रहे, तो जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में पेट्रोल-डीजल 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है।
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव के चलते क्रूड ऑयल 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने सारा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला, जिसके कारण उन्हें मार्च से मई के बीच करीब 1 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) सहना पड़ा। केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर भी लोगों को राहत दी थी। अब जबकि कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर के नीचे आ गए हैं, तो तेल कंपनियों के मार्जिन में लगातार सुधार हो रहा है। भू-राजनीतिक जानकारों और पूर्व राजनयिकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर हालात अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं, इसलिए सरकार आम लोगों को कीमतों में कोई भी स्थाई राहत देने से पहले पूरी तरह से स्थिरता का इंतजार कर रही है।
