February 17, 2026

महाराष्ट्र निकाय चुनाव: पुणे में फिर एक हुआ ‘पवार परिवार’

चाचा-भतीजे की पार्टी लड़ेगी साथ, कांग्रेस में शामिल हुए नाराज नेता

मुंबई, महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनावों ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पार्टी में हुई बड़ी टूट के बाद अब पवार परिवार एक बार फिर एक मंच पर आ गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और उनके चाचा शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे में भी एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे पहले पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के लिए भी दोनों दलों के बीच गठबंधन की घोषणा की जा चुकी है, जिसे सियासी गलियारों में एक बड़ी घटना माना जा रहा है।

रविवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार पिंपरी-चिंचवड़ में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे, जहां उन्होंने आधिकारिक तौर पर गठबंधन की पुष्टि की। उन्होंने मंच से ऐलान किया कि अब घड़ी और तुरही (दोनों गुटों के चुनाव चिन्ह) एक हो गए हैं। अजित पवार ने भावुक होते हुए कहा कि परिवार एक साथ आ गया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे रैलियों के दौरान किसी भी तरह की विवादित टिप्पणी से बचें और सिर्फ विकास के मुद्दों पर ध्यान दें। वहीं, शरद पवार के पोते और विधायक रोहित पवार ने भी कहा कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के कार्यकर्ताओं की इच्छा का सम्मान करते हुए ही दोनों पार्टियों ने गठबंधन का यह अहम कदम उठाया है।

राजनीतिक गठबंधन के साथ-साथ पारिवारिक एकजुटता की झलक बारामती में भी देखने को मिली। दिन की शुरुआत में पूरा पवार परिवार बारामती में मौजूद था, जहां उद्योगपति गौतम अदाणी ने शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में अजित पवार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे उन लोगों को सत्ता से बाहर करेंगे जिन्होंने नगर निगम को कर्ज के बोझ तले दबा दिया था। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे समेत राज्य के 29 नगर निकायों में 15 जनवरी को मतदान होगा और अगले दिन मतगणना होगी। नामांकन की आखिरी तारीख 30 दिसंबर है।

हालांकि, चाचा-भतीजे के इस गठबंधन से पार्टी के भीतर बगावत के सुर भी उठने लगे हैं। पुणे के पूर्व महापौर और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की शहर इकाई के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ गठबंधन की योजना से नाराज होकर जगताप ने अपनी पार्टी छोड़ दी और शुक्रवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। जगताप का यह कदम बताता है कि शीर्ष नेतृत्व के फैसले से जमीनी स्तर के कुछ नेताओं में असंतोष है।

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