September 19, 2026

यूएन में भारत का आतंकवाद पर दो टूक संदेश- अच्छा या बुरा आतंकवादी नहीं होता

दुनिया से दोहरे मापदंड खत्म करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए दुनिया के देशों से इस वैश्विक खतरे के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि किसी भी कारण, विचारधारा या परिस्थिति के नाम पर आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को अब दोहरे मापदंड छोड़ने होंगे। कोई भी आतंकवादी अच्छा या बुरा नहीं होता, आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले, उसे वित्तीय मदद देने वाले और आतंकियों को शरण देने वाले देशों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद का सामना करता रहा है। इस दौरान देश ने हजारों लोगों की जान गंवाई है, परिवार उजड़े हैं और समाज को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसी अनुभव के आधार पर भारत का मानना है कि आतंकवाद के समर्थन में कोई भी तर्क स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारणों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन किसी भी परिस्थिति को आतंकवादी हिंसा का औचित्य नहीं बनाया जा सकता। सबसे बड़ा मानवाधिकार जीने का अधिकार है और आतंकवाद इसी मूल अधिकार पर सबसे बड़ा हमला है।

भारत ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर भी विशेष जोर दिया। भारत ने कहा कि आतंकियों तक पहुंचने वाले धन को रोकने के लिए देशों के बीच वित्तीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाया जाना चाहिए और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के मानकों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, ताकि आतंकवादी संगठनों की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।

भारत ने यह भी चिंता जताई कि आतंकवादी संगठन आधुनिक तकनीकों का तेजी से दुरुपयोग कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर कोई ठोस सहमति न बन पाने को भारत ने निराशाजनक बताया और तकनीकी संसाधनों को आतंकियों की पहुंच से दूर रखने के लिए प्रभावी वैश्विक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने संबोधन में भारत ने सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की बात करते हुए कहा कि किसी भी धर्म, जाति या नस्ल के खिलाफ नफरत स्वीकार्य नहीं है। भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को केवल इस्लाम, ईसाई या यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हिंदू, सिख, बौद्ध और अन्य सभी धर्मों के खिलाफ होने वाले घृणा अपराधों और भेदभाव पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

भारत ने यह भी याद दिलाया कि उसने लगभग 30 वर्ष पहले व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक सम्मेलन का प्रस्ताव रखा था, जो अब तक लंबित है। भारत का कहना है कि इस वैश्विक कानूनी ढांचे के अभाव में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई कमजोर पड़ रही है।

भारत ने दुनिया के देशों से राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाने और जल्द से जल्द इस वैश्विक कानून को पारित करने की अपील की, ताकि आतंकवादियों को कहीं भी शरण, वित्तीय सहायता और हथियार उपलब्ध न हो सकें।

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