September 19, 2026

बेअदबी कानून में संशोधन नहीं हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई: अकाल तख्त

पंजाब सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम

अमृतसर, श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार द्वारा पारित जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए सरकार को एक महीने के भीतर कानून में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने स्पष्ट किया कि बेअदबी करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन सिख मर्यादा, धार्मिक शब्दावली और पंथ से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने का अधिकार केवल सिख पंथ और अकाल तख्त का है, न कि विधानसभा का।

सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई विशेष सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के सिख मंत्री और विधायक नंगे पैर लिखित स्पष्टीकरण के साथ पेश हुए। सुनवाई में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहे।

सुनवाई की शुरुआत में जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो सार्वजनिक वीडियो चलवाए, जिनमें वे कथित तौर पर यह कहते सुनाई देते हैं कि यदि बेअदबी का आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो तो उसके माता-पिता या अभिभावक को भी सजा मिल सकती है। जत्थेदार ने उपस्थित मंत्रियों और विधायकों से पूछा कि क्या ऐसा प्रावधान वास्तव में कानून में शामिल है। इस पर मंत्री स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस दौरान कुछ विधायकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने विधेयक को विस्तार से पढ़े बिना ही सदन में समर्थन दिया था।

जत्थेदार ने कहा कि यदि सरकार सिख धर्म से जुड़े किसी कानून में बदलाव करना चाहती है तो उसे पहले श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित संबंधित धार्मिक संस्थाओं से सलाह-मशवरा करना चाहिए। सुनवाई के दौरान विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि सुझावों के लिए एसजीपीसी को आमंत्रित किया गया था। वहीं कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि उन्होंने विधानसभा में इस विषय पर चर्चा की मांग उठाई थी, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।

छह प्रमुख बिंदुओं पर जताई आपत्ति

– धार्मिक शब्दावली में बदलाव पर आपत्ति
जत्थेदार ने कहा कि कानून में ‘बीड़’ की जगह ‘स्वरूप’ शब्द का प्रयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि सिख धार्मिक शब्दावली तय करने का अधिकार विधानसभा को नहीं है।

– ‘कस्टोडियन’ शब्द हटाने की मांग
कानून में ‘कस्टोडियन’ (संभालकर्ता) शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। अकाल तख्त का कहना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सेवा और जिम्मेदारी तय करने का अधिकार केवल पंथ का है।

– यूनिक नंबर और ऑनलाइन रिकॉर्ड पर सवाल
कानून में प्रत्येक स्वरूप को यूनिक नंबर देने तथा उसका रिकॉर्ड रखने के प्रावधान पर भी आपत्ति जताई गई। जत्थेदार ने कहा कि इस प्रकार के निर्णय गुरमत परंपरा के अनुसार पंथ के स्तर पर होने चाहिए।

– कस्टोडियन की जिम्मेदारियां तय करने का विरोध
अकाल तख्त ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सेवा, संरक्षण और मर्यादा से जुड़े नियम धार्मिक विषय हैं, जिन्हें विधानसभा तय नहीं कर सकती।

– दंड संबंधी प्रावधान स्पष्ट करने की मांग
कानून में बेअदबी के अलावा जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही कस्टोडियन को दंडित करने वाले प्रावधान पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई।

– दुर्घटना की स्थिति का उल्लेख नहीं
जत्थेदार ने कहा कि कानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि किसी दुर्घटना के कारण घटना होती है तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब को केस प्रॉपर्टी नहीं बनाया जाएगा। इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान जोड़े जाने की आवश्यकता है।

एक महीने में संशोधन का निर्देश
सुनवाई के अंत में अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि कानून में चिन्हित सभी आपत्तियों पर एक महीने के भीतर आवश्यक संशोधन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। जत्थेदार ने दोहराया कि सरकार को बेअदबी के मामलों में कठोर कानून बनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन धार्मिक परंपराओं, सिख मर्यादा और पंथ से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने से पहले सिख समुदाय की मान्यता प्राप्त संस्थाओं से परामर्श किया जाना आवश्यक है।

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