April 16, 2026

तेल महंगा रहा तो दुनिया भर पर पड़ेगी महंगाई की मार: आईएमएफ

नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो दुनिया को कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

आईएमएफ और विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग के दौरान जॉर्जीवा ने बताया कि 28 फरवरी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से तेल और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है। यह मार्ग वैश्विक स्तर पर तेल और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की सप्लाई के लिए बेहद अहम है। सप्लाई में बाधा आने से विशेष रूप से आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है।

आईएमएफ प्रमुख ने आगाह किया कि यदि उर्वरकों की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर खाद्य कीमतों पर पड़ेगा। इससे महंगाई और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि कम आय वाले देशों में लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, इसलिए वहां इसका प्रभाव अधिक गंभीर होगा।

जॉर्जीवा ने केंद्रीय बैंकों को सलाह दी कि वे ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करने से बचें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें। जिन देशों में महंगाई पहले से नियंत्रण में है, वहां वेट एंड वॉच रणनीति अपनाई जा सकती है, जबकि जिन देशों में केंद्रीय बैंकों की विश्वसनीयता कम है, वहां सख्त कदम उठाने की जरूरत हो सकती है।

आईएमएफ ने संकेत दिया है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता दी जा सकती है। फिलहाल संस्था के 39 कार्यक्रम चल रहे हैं और आने वाले समय में कई और देशों को मदद की जरूरत पड़ सकती है। अनुमान के मुताबिक, 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त फंडिंग की मांग सामने आ सकती है। आईएमएफ प्रमुख ने सरकारों को यह भी सलाह दी कि आम लोगों को राहत देने के लिए उठाए जाने वाले कदम सोच-समझकर हों। बिना लक्ष्य के उठाए गए कदम—जैसे निर्यात पर रोक या बड़े पैमाने पर टैक्स कटौती—महंगाई की समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

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