September 17, 2026

हाईवे पर बेसहारा पशुओं को लेकर बड़ा एक्शन, हर 100 किलोमीटर पर बनेगा एक ‘पशु आश्रय स्थल’

राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बेसहारा पशुओं को हाईवे से हटाने, सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और उनके रखरखाव को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है।

नई व्यवस्था में हाईवे एजेंसियों से लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन तक की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं।

SOP के तहत NHAI और राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन एवं रखरखाव से जुड़ी एजेंसियां ऐसे स्थानों की पहचान करेंगी, जहां हाईवे पर बार-बार बेसहारा पशु दिखाई देते हैं। इन स्थानों को पीएम गति-शक्ति प्लेटफॉर्म पर भी चिन्हित किया जाएगा।

हाईवे पर पशु मिलने के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाकर नजदीकी आश्रय स्थल, पशु बाड़े या गौशाला तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित हाईवे एजेंसी की होगी। इसके लिए होने वाला परिवहन खर्च भी संबंधित एजेंसी को उठाना होगा।

नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार और जिला प्रशासन को हर 100 किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक पशु आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला की व्यवस्था करनी होगी। जिन इलाकों को पशुओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाएगा, वहां यह दूरी घटाकर 50 किलोमीटर की जाएगी।

इन आश्रय स्थलों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य या जिला प्रशासन की होगी।

बेसहारा पशुओं की समस्या वाले इलाकों में रूट पेट्रोलिंग वाहनों और उपलब्ध होने पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए 24 घंटे निगरानी की जाएगी। पशु दिखाई देने पर उसकी GPS लोकेशन के साथ जानकारी संबंधित नोडल अधिकारी तक पहुंचाई जाएगी।

हाईवे के अलग-अलग हिस्सों में पशुओं की मौजूदगी वाले हॉटस्पॉट की मैपिंग भी की जाएगी। यहां CCTV, बैरियर, लाइटिंग, साइनेज और तारबंदी जैसे सुरक्षा इंतजाम किए जा सकेंगे।

चिन्हित हॉटस्पॉट की हर छह महीने में समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा हाईवे एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स के बीच हर महीने समन्वय बैठक होगी, ताकि समस्या वाले क्षेत्रों में कार्रवाई की समीक्षा की जा सके।

SOP में पशु आश्रय स्थलों का रिकॉर्ड रखने और बेसहारा पशुओं के मालिकों की पहचान करने की व्यवस्था भी शामिल है। मालिक की पहचान होने पर संबंधित राज्य में लागू कानूनों के अनुसार जुर्माना या अन्य कार्रवाई की जा सकेगी।

राज्यों को एक स्टेट लेवल नोडल अथॉरिटी भी बनानी होगी, जो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और NHAI के साथ समन्वय करेगी।

नई SOP का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी से होने वाले हादसों को कम करना और पशुओं को सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को स्पष्ट करना है।

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