April 20, 2026

रूस से तेल खरीदने बारे अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट एक महीने के लिए बढ़ाई

नई दिल्ली, होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के बावजूद वैश्विक तेल और गैस संकट अभी भी बना हुआ है। इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है, जिससे भारत सहित कई देशों को अस्थायी राहत मिल सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन—जिसका नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं—ने शुक्रवार को नई छूट जारी की। इसके तहत देशों को समुद्र में पहले से लदे रूस के तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 16 मई तक खरीदने की अनुमति दी गई है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो हालिया संघर्षों के कारण बढ़ गई थीं।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी इस लाइसेंस ने 11 अप्रैल को समाप्त हुई 30-दिवसीय छूट की जगह ली है। हालांकि इसमें ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन शामिल नहीं हैं।

इस छूट को बढ़ाने का मुद्दा हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत में उठा था। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण भारत इस राहत को जारी रखने के पक्ष में था। दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला स्कॉट बेसेंट के उस बयान के तुरंत बाद आया, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

रूस की ओर से किरिल दिमित्रीव ने कहा था कि पहली छूट से लगभग 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल की सप्लाई बाजार में आ सकती है, जो वैश्विक उत्पादन के एक दिन के बराबर है। हालांकि इस अतिरिक्त आपूर्ति के बावजूद तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिसका एक बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया व्यवधान रहा है।

नई दिल्ली में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भरोसा जताया है कि रूस भारत को कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बढ़ाता रहेगा। उनके अनुसार, भारत एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार है और रूस उसकी जरूरतों के अनुसार सप्लाई जारी रखेगा।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में भारत का रूस से कच्चा तेल आयात तेज़ी से बढ़ा। यह फरवरी के 1.54 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। मार्च 2022 के बाद से भारत, रूस के लिए एक प्रमुख तेल बाजार बनकर उभरा है और 2024 में उसने लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा।

कुल मिलाकर, यह अस्थाई छूट जहां भारत जैसे देशों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं यह पश्चिमी देशों की उस रणनीति को जटिल बना सकती है, जिसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व को सीमित करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *