भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा की आधारशिला है संस्कृत : अभिषेक गर्ग
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने चकमोह में मनाया संस्कृत दिवस
हमीरपुर । संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य पर भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने सोमवार को विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय चकमोह में विभिन्न संस्कृत प्रतियोगिताओं, कवि सम्मेलन एवं लेखक गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हमीरपुर के एडीसी अभिषेक गर्ग रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार धनी राम संगर ने की। कार्यक्रम का मंच संचालन मनोज शर्मा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर एडीसी अभिषेक गर्ग ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान, साहित्य एवं सांस्कृतिक परंपरा की महत्वपूर्ण संवाहक है। संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विद्यार्थियों को इससे जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को हमारी गौरवशाली भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।
वरिष्ठ साहित्यकार धनी राम संगर ने संस्कृत साहित्य की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत भारतीय साहित्य, दर्शन, संस्कृति एवं ज्ञान-विज्ञान की महत्वपूर्ण भाषा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन एवं साहित्यिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित संस्कृत कवि सम्मेलन एवं लेखक गोष्ठी में जिला हमीरपुर के अनेक साहित्यकारों एवं कवियों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रो. सुमन लता, डॉ. जगदीश, डॉ. कमलेश शर्मा, डॉ. अजय शर्मा, रत्न चन्द रत्नाकर, प्रोमिला, डॉ. विनय किशोर, दीपिका रानी, डॉ. धनी राम संगर, डॉ. रमेश चंद सांख्यान, प्रो. पुरुषोत्तम दत्त कालिया, डॉ. जगदीश चंद, डॉ. अमित शत्मा और नरेश मलोटिया सहित साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं एवं विचारों के माध्यम से संस्कृत भाषा एवं साहित्य की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया। लेखक गोष्ठी में साहित्य, भाषा, संस्कृति तथा संस्कृत के वर्तमान परिदृश्य एवं भावी संभावनाओं पर सार्थक चर्चा की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अध्यापकों, साहित्यकारों एवं संस्कृत प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों, अध्यापकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत दिवस जैसे आयोजन हमारी भाषा एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने के लिए भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग सदैव कृतसंकल्प है।
