August 14, 2026

सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने

नई दिल्ली, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन करते हुए देशवासियों की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका, विभाजन की त्रासदी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और पिछले एक दशक से अधिक समय में हुए विकास का उल्लेख किया।

राष्ट्रपति ने कहा, “15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुईं। सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने।” उन्होंने कहा कि निष्ठावान विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए तत्पर वैज्ञानिक और इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनती श्रमिक और अन्नदाता किसान अपने प्रयासों से राष्ट्र-निर्माण कर रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में सक्रिय असंख्य देशवासी तथा संविधान में निहित मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिक राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। राष्ट्रपति ने सभी की हृदय से सराहना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि अपनी समृद्ध विरासत और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए भारत आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है। “वयं राष्ट्रे जागृयाम”, यह वेद-वाक्य हमें प्रेरणा देता है कि हम राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में अनगिनत देशवासी स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने समाज सुधार तथा राष्ट्र-निष्ठा के उच्च आदर्श प्रस्तुत किए। उन्होंने भारतमाता की उन सभी महान संतानों को सादर नमन किया, जिनके आदर्शों पर चलते हुए देश स्वतंत्र हुआ और आगे बढ़ा। राष्ट्रपति ने कहा कि आज 14 अगस्त के दिन को हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और बंटवारे की विभीषिका सहन करनी पड़ी। फिर भी, उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ, उस समय देश के विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ-साथ 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत के साथ जोड़ना भी एक असाधारण चुनौती थी। सरदार पटेल ने राजशाही व्यवस्थाओं को समाप्त करके हमारे स्वाधीन लोकतंत्र में उनका विलय किया। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना सदा से विद्यमान रही है। उस भावना को नई ऊर्जा के साथ हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग अनेक क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे उनका यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे। न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है, विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है तथा विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है। उन्होंने कहा कि हमारे देशवासी महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहे हैं। महात्मा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके आदर्शों के अनुसार विगत कुछ वर्षों के दौरान वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है। विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेश की योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। इनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था द्वारा उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *