August 11, 2026

चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगा बड़ा झटका

लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद हवा में विस्फोट का शिकार

नई दिल्ली,  चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा, जब लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट प्रक्षेपण (लॉन्च) के कुछ ही समय बाद हवा में विस्फोट का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में वह संचार उपग्रह भी नष्ट हो गया, जिसे रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए ले जा रहा था। यह घटना चीन के अंतरिक्ष मिशनों में अपेक्षाकृत दुर्लभ विफलताओं में से एक मानी जा रही है।

सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि रॉकेट ने चीन के हैनान द्वीप स्थित वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से उड़ान भरी थी। लॉन्च के लगभग 85 सेकंड बाद रॉकेट हवा में टूट गया और एक विशाल अग्निगोले में बदल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रॉकेट को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद बिखरते हुए देखा जा सकता है। रॉकेट में झोंगशिंग-4बी (चाइनासैट-4बी) संचार उपग्रह लगाया गया था, जिसका उपयोग दुनिया भर में रेडियो, टेलीविजन और अन्य संचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना था। हादसे के कारण यह मिशन पूरी तरह विफल हो गया।

घटना के करीब तीन घंटे बाद चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने मिशन की विफलता की पुष्टि की। एजेंसी ने बताया कि उड़ान के दौरान रॉकेट में “तकनीकी असामान्यता” उत्पन्न हुई, जिसके कारण मिशन सफल नहीं हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दुर्घटना को लेकर चीन के सरकारी मीडिया में अपेक्षाकृत कम जानकारी दी गई। वहीं चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शियाओहोंगशू और डोयिन पर भी लॉन्च के वीडियो मुख्य रूप से सरकारी या राज्य समर्थित अकाउंट्स तक सीमित दिखाई दिए। निजी उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए कई वीडियो सर्च परिणामों से हटाए गए या उनकी दृश्यता कम कर दी गई। इस विफलता के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रॉकेट में तकनीकी खराबी किस वजह से आई और उड़ान के शुरुआती चरण में ही वह क्यों नष्ट हो गया।

गौरतलब है कि लॉन्ग मार्च 7ए चीन के सबसे महत्वपूर्ण प्रक्षेपण वाहनों में से एक माना जाता है और इसे बीजिंग के अंतरिक्ष कार्यक्रम का “वर्कहॉर्स” कहा जाता है। इसका विकास चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी ने किया है, जो सरकारी कंपनी चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन (सीएएससी) की सहायक इकाई है। यह लॉन्ग मार्च 7ए का 18वां मिशन था। इससे पहले इस रॉकेट को केवल एक बार, वर्ष 2020 में अपनी पहली उड़ान के दौरान असफलता का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से यह कई सफल मिशनों को पूरा कर चुका था। यह दुर्घटना ऐसे समय में हुई है जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग देश को वर्ष 2050 तक अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक अग्रणी शक्ति बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। चीन वर्तमान में अमेरिका के साथ पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक, चंद्र मिशनों और उपग्रह प्रक्षेपण जैसे क्षेत्रों में कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

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