रत्ती खड्ड में किया गया अमूर कार्प मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन
मंडी, मत्स्य मण्डल मण्डी द्वारा आज सहायक निदेशक मत्स्य नीतू सिंह की देखरेख में कसारला में 70 मिमी एवं उससे अधिक आकार की अमूर कार्प अंगुलिकाओं का संचयन किया गया, ताकि रत्ती खड्ड में इस प्रजाति की मछलियों की संख्या का पुनः संवर्धन एवं पुनर्स्थापन सुनिश्चित किया जा सके। यह मत्स्य बीज विभागीय कार्प फार्म, अलसू में उत्पादित किया गया है। यह कार्य विभागीय कर्मचारियों, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन रत्ती के सदस्यों तथा स्थानीय लोगों की उपस्थिति संपन्न हुआ।
इस अवसर पर नीतू सिंह ने बताया कि इंडस्ट्रियल एसोसिएशन रती ने इस मत्स्य बीज संचयन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसोसिएशन द्वारा ही मत्स्य बीज के क्रय एवं संचयन का प्रस्ताव विभाग को दिया गया था, जिसके फलस्वरूप यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उन्होंने स्थानीय जनता एवं इंडस्ट्रियल एसोसिएशन रत्ती से अपील की कि रती खड्ड में उद्योगों अथवा घरों का सीवरेजयुक्त गंदा पानी न छोड़ा जाए, क्योंकि इससे खड्ड का जल प्रदूषित होता है तथा मछलियों के मरने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी औद्योगिक इकाई के पाइप, सोक टैंक अथवा अन्य सीवरेज प्रणाली में रिसाव की समस्या उत्पन्न होती है, तो इसकी सूचना समय रहते जिला उद्योग केन्द्र, मण्डी को दी जाए। इसी प्रकार यदि कोई स्थानीय व्यक्ति अपने निजी सीवरेज का गंदा पानी रती खड्ड में छोड़ता है, तो इसकी शिकायत हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय, मण्डी को करें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
उन्होंने स्थानीय मछुआरों से भी अपील की कि आगामी 15 अगस्त, 2026 तक मत्स्य आखेट पूर्णतः प्रतिबंधित है। इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के मत्स्य आखेट से बचें और जो भी व्यक्ति अवैध मत्स्य आखेट करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मत्स्य अधिनियम, 1976 तथा मत्स्य नियमावली, 2020 के अंतर्गत दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर भारी जुर्माना वसूलने का प्रावधान है।
