भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को महिला डॉक्टर की मौत के मामले में कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
नई दिल्ली, बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक गंभीर मामले में 4 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उनकी विधायकी जाना तय हो गया है। साल 2018 में न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसी मामले में पिछले महीने भाजपा विधायक राजू सिंह को दोषी करार दिया गया था, जिस पर अदालत ने शनिवार को सजा का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी विधायक को पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का भी सख्त आदेश दिया है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी कर ली थी। सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक राजू सिंह के वकील ने उनके अच्छे आचरण का हवाला देते हुए रिहाई देने या सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। कोर्ट से कहा गया कि राजू सिंह 6 बार के विधायक हैं, समाज सेवा से जुड़े हैं और पहले कभी किसी मामले में दोषी नहीं ठहराए गए हैं। वकील ने उन्हें 2 साल से कम सजा देने की दलील दी ताकि उनकी विधायकी बची रहे, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए उन्हें 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुना दी।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने बीते 6 जून को विधायक राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-दो) यानी गैर इरादतन हत्या और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया था। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में विधायक राजू सिंह और उनकी पत्नी रेणु सिंह समेत कुल 4 लोगों को आरोपी बनाया था। पिछले महीने ट्रायल पूरा होने के बाद कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को मुख्य रूप से दोषी करार दिया, जबकि उनकी पत्नी रेणु सिंह समेत 3 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया।
यह पूरा मामला 31 दिसंबर 2018 का है, जब दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्म हाउस में न्यू ईयर की शानदार पार्टी आयोजित की गई थी। उस पार्टी में भाजपा विधायक राजू सिंह अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। जश्न के दौरान वहां हर्ष फायरिंग (हवा में गोली चलाना) की गई। इसी दौरान चली एक गोली पार्टी में मौजूद महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता को जा लगी, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि जश्न के नाम पर हथियारों का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल और हर्ष फायरिंग जैसे कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
