June 15, 2026

ईरान को 300 अरब डॉलर देगा अमेरिका, जानें अमेरिका-ईरान का 14 सूत्रीय शांति समझौता

तेहरान, अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति होने का दावा किया जा रहा है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक कथित मसौदे के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक व्यापक शांति समझौते पर सहमति बनी है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को समाप्त करने, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने तथा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इस दस्तावेज को अभी तक अमेरिका या ईरान की सरकारों ने आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है।

महीनों की वार्ता के बाद तैयार हुआ मसौदा
रिपोर्टों के अनुसार, कई महीनों तक चली कूटनीतिक बातचीत के बाद समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार किया गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी एक बयान जारी कर इस प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बताया है। परिषद के अनुसार, यह समझौता भविष्य में व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और परमाणु मुद्दों पर होने वाली बातचीत का आधार बनेगा।

बताया जा रहा है कि प्रारंभिक समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष टकराव को समाप्त करना और विश्वास बहाली के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार प्रस्तावित समझौते में कई अहम बिंदु शामिल किए गए हैं। इनमें क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को तत्काल रोकना, ईरान की संप्रभुता का सम्मान करना, समुद्री नाकेबंदी हटाना, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत देना तथा ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करना शामिल है।

इसके अलावा, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण एवं आर्थिक सहायता पैकेज उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। मसौदे में परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की अतिरिक्त वार्ता अवधि का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि प्रस्तावित समझौते को तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं।

मसौदे में ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन की सीमा, परमाणु स्थलों की निगरानी और अतिरिक्त निरीक्षण तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। यही कारण है कि अंतिम और व्यापक समझौते के लिए आगे की बातचीत को निर्णायक माना जा रहा है।

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