May 30, 2026

अपने ही बूथ पर हारे टीएमसी के 9 दिग्गज नेता, ममता बनर्जी की हार की इनसाइड स्टोरी आई सामने

चुनाव आयोग के आंकड़ों से मचा हड़कंप

कोलकाता, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई मजबूत और पुराने किलों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए बूथ स्तर के आधिकारिक आंकड़ों से जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, टीएमसी के प्रमुख 36 शीर्ष नेताओं में से केवल 14 नेता ही इस चुनावी सुनामी में अपनी सीट बचा पाने में कामयाब रहे हैं, जबकि टीएमसी के 22 दिग्गज नेताओं को बेहद शर्मनाक और करारी हार का सामना करना पड़ा है।

इस बार के चुनावी नतीजों में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा कद्दावर मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन विधानसभा सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का सबसे सुरक्षित और अभेद्य गढ़ माना जाता था। स्थिति यह रही कि 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत का स्वाद चख सके।

भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का एकतरफा जलवा, ममता बनर्जी को बड़े अंतर से पटखनी
भवानीपुर विधानसभा सीट, जहां से ममता बनर्जी ने साल 2021 के उपचुनाव में रिकॉर्ड मतों से बड़ी जीत हासिल की थी, वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त देकर इतिहास दोहरा दिया है। यह लगातार दूसरा ऐसा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु अधिकारी ने सीधे मुकाबले में ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों का गणित देखें तो ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही अपनी बढ़त बना सकीं।

हालांकि, ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन (बूथ संख्या 207) पर 63.33 प्रतिशत वोट शेयर के साथ निजी जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट को भाजपा की आंधी से बचाने के लिए नाकाफी साबित हुआ। ममता पूरी विधानसभा में केवल 54 बूथों पर ही 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर पाईं। इसके विपरीत, भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ तो ऐसे थे जहां उन्हें 80 प्रतिशत से भी अधिक बंपर वोट मिले।

ममता सरकार के चार सबसे प्रमुख चेहरे और कैबिनेट मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी-अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से महज 15 प्रतिशत बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा के उम्मीदवारों ने बेहद बड़े अंतर से शिकस्त देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। पूरी टीएमसी में केवल तीन मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे, जिन्होंने अपनी सीटों के 80 प्रतिशत से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज कर पार्टी की लाज बचाई।

इसके अलावा आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में वोटर के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे खुद चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता ही अपने खुद के घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिल सकी। कुल मिलाकर देखें तो अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट बचा पाए, बाकी सब मटियामेट हो गए।

चुनाव आयोग के आंकड़े साफ बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को सत्ता से बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक और गणितीय तरीके से जीत दर्ज की है। जिन 22 हाई-प्रोफाइल सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे हैं, उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30 प्रतिशत से भी कम हिस्से पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे कुशलतापूर्वक पूरी सीट जीतने में कामयाब रहे। उदाहरण के लिए, भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को धूल चटा दी, जबकि सिकदार केवल 3.78 प्रतिशत बूथों पर ही 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे।

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