पेपर लीक के तार अब एनटीए अधिकारी से जुड़े
ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे के जरिए परीक्षा से 6 दिन पहले लीक हुआ था प्रश्नपत्र
नई दिल्ली, नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की आंतरिक जांच रिपोर्ट से एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस पूरे घोटाले के तार अब सीधे परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (एनटीए) के शीर्ष अधिकारियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच के मुताबिक, पुणे से गिरफ्तार की गई ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे सीधे एक एनटीए अधिकारी के संपर्क में थी और उसी के जरिए परीक्षा से 6 दिन पहले यानी 27 अप्रैल को ही पेपर और उसके उत्तर लीक कर दिए गए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, एनटीए कार्यालय का वह हिस्सा जहाँ पेपर सेट किया जाता है, पूरी तरह गोपनीय होता है। वहां किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, मोबाइल या पेन तक ले जाने की सख्त मनाही होती है। ऐसे सुरक्षित क्षेत्र से पेपर का बाहर आना बिना किसी अंदरूनी अधिकारी की मिलीभगत के असंभव है। शक के दायरे में आए एनटीए अधिकारी वे हो सकते हैं, जिन पर एक्सपर्ट कमेटी बनाने से लेकर पेपर फाइनल करने तक की मुख्य जिम्मेदारी होती है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, नीट परीक्षा के लिए तैयार किए गए दोनों सेट (मुख्य और रिजर्व पेपर) लीक किए गए थे। आरोपियों ने चालाकी दिखाते हुए दोनों सेटों के प्रश्नों को आपस में मिलाकर एक गेस पेपर तैयार किया था। यही वजह है कि लीक हुए पेपर में कई सवाल और उनके विकल्प हूबहू परीक्षा के मुख्य पेपर से मैच कर रहे हैं। कुल 720 अंकों में से 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले ही लीक हो चुके थे।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे ने मनीषा वाघमारे के कहने पर छात्रों की विशेष क्लास ली थी। इसके बदले आरोपियों को लाखों रुपये कैश और बैंक ट्रांसफर के जरिए मिले। धांधली को छिपाने के लिए 3 मई को परीक्षा समाप्त होते ही उस पेपर को जला दिया गया और वॉट्सएप व टेलीग्राम चैट्स समेत लैपटॉप का सारा डेटा डिलीट कर दिया गया। फिलहाल सीबीआई इन डिजिटल सबूतों को रिकवर करने में जुटी है।
