पंचायत चुनावों में मंदिर और मस्जिद जैसे चिह्न अब नहीं मिलेंगे
आयोग ने निष्पक्षता के लिए धार्मिक प्रतीक हटाए
देस राज शर्मा, शिमला, एक समय ऐसा भी था जब पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए पशु, धार्मिक स्थल और सामाजिक प्रतीकों का चुनाव चिह्न के रूप में इस्तेमाल होता था। बैल, घोड़ा, ऊंट, हाथी, गाय और मुर्गा जैसे पशुओं के साथ-साथ मंदिर, मस्जिद और अन्य धार्मिक प्रतीक चुनाव चिह्न होते थे। अब इन चिह्नों का वापस ले लिया गया है।
पहले बड़ी संख्या में मतदाता अशिक्षित होते थे, इसलिए चुनाव चिह्न ही उम्मीदवार की पहचान का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता था। समय के साथ चुनाव प्रक्रिया में बदलाव आया। चुनाव आयोग ने निष्पक्षता तथा धार्मिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से ऐसे कई प्रतीकों को सूची से हटाना शुरू किया। आयोग का मानना था कि धार्मिक स्थलों या किसी विशेष समुदाय से जुड़े प्रतीकों का चुनाव में इस्तेमाल अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। या फिर मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण मंदिर, मस्जिद और अन्य धार्मिक प्रतीकों को चुनाव चिह्नों की सूची से बाहर किया गया है। इसी तरह पशुओं वाले चिह्न भी हटाए गए। पशुओं के प्रतीकों पर भावनात्मक जुड़ाव और विवाद की स्थिति बनती थी। बाद में आयोग ने ऐसे चिह्नों की जगह दैनिक वस्तुओं और सामान्य प्रतीकों को प्राथमिकता दी है।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ने वाले सभी दावेदारों को आज चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे। इससे पहले, इच्छुक व्यक्ति दोपहर तीन बजे तक अपने नॉमिनेशन वापस ले सकेंगे। नॉमिनेशन वापसी के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होगी कि किस पंचायत में किस पद के लिए कितने दावेदार मैदान में बचे हैं।
