कनाडा ने खालिस्तान चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया
नई दिल्ली, कनाडा की खुफिया एजेंसी ने खालिस्तानी उग्रवादियों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया है। एजेंसी का कहना है कि कनाडा में सक्रिय कुछ चरमपंथी समूह सरकारी और सामाजिक संस्थानों का इस्तेमाल कर अपने अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही, समुदाय के भीतर से जुटाए गए धन का उपयोग हिंसक गतिविधियों और प्रचार अभियानों में किए जाने की भी आशंका जताई गई है।
कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस की वर्ष 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट शुक्रवार को सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में मौजूद कुछ खालिस्तानी समर्थक तत्व लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं और उनकी गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये उग्रवादी समूह कनाडा में उपलब्ध स्वतंत्र संस्थागत ढांचे और सामुदायिक नेटवर्क का उपयोग अपने प्रचार और फंडिंग के लिए करते हैं। एजेंसी ने कहा कि कुछ लोग समुदाय से आर्थिक सहायता जुटाकर उसे हिंसा से जुड़ी गतिविधियों और विदेशी अभियानों में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।
सीएसआईएस ने स्पष्ट किया कि खालिस्तानी उग्रवाद उन संगठनों और व्यक्तियों से जुड़ा है, जो भारत के भीतर अलग संप्रभु राज्य की मांग का समर्थन करते हैं। भारत सरकार पहले ही कई ऐसे संगठनों को आतंकी गतिविधियों और अलगाववाद से जुड़े आरोपों के चलते प्रतिबंधित कर चुकी है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसे लोगों की संख्या सीमित है और कनाडा में रहने वाले अधिकांश सिख नागरिक शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं।
इस रिपोर्ट को भारत-कनाडा संबंधों के संदर्भ में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2023 में दोनों देशों के रिश्तों में उस समय तनाव बढ़ गया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित भूमिका का आरोप लगाया था। खुफिया एजेंसी की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश कूटनीतिक संबंधों को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से कनाडा सरकार पर उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है।
