लोकसभा में भाजपा ने नक्सली हिंसा के लिए कांग्रेस को ठहराया दोषी
विपक्ष ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नक्सली हिंसा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा में बहस के दौरान भाजपा सांसद संबित पात्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का जिक्र करते हुए माओवाद को भारत के सामने सबसे खतरनाक खतरा बताया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस आंदोलन को नरमी से देखती रही है। पात्रा ने लेखिका अरुंधति रॉय के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें माओवादियों को ‘बंदूक वाले गांधीवादी’ कहा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच खतरे को सही तरीके से समझने में बाधा डालती है।
उन्होंने 2 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ में हुए हमले को याद किया, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। यह भारतीय सुरक्षा बलों पर एक दिन में हुआ सबसे बड़ा हमला था।
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने पाप किया है और पार्टी की नीतियों ने देश की सुरक्षा को कमजोर किया।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में किलेबंद पुलिस स्टेशनों की संख्या 2014 में 66 से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 586 हो गई है।
उन्होंने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि हालात सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि अगर शांति बहाल हो गई है, तो सुरक्षा व्यवस्था लगातार क्यों बढ़ाई जा रही है?
दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जवानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। सीआरपीएफ और आईपीएस अधिकारियों के बीच पदोन्नति में समानता की सिफारिश की गई थी, लेकिन सरकार ने इस पर अमल नहीं किया।
