March 16, 2026

हम युद्ध नहीं चाहते, वैश्विक नेताओं की जिम्मेवारी वे जंग रुकवाएं: ईरान

नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और मौजूदा संघर्ष की शुरुआत उस समय हुई जब ईरान बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा था।

एक निजी समाचार एजेंसी से बातचीत में इलाही ने कहा कि क्षेत्र में पैदा हुए हालात के लिए ईरान जिम्मेदार नहीं है। उनके मुताबिक, जब वार्ता जारी थी तभी उन पर हमला किया गया, जिसके बाद हालात युद्ध की स्थिति में पहुंच गए। इलाही ने कहा कि ईरान कभी भी लोगों की पीड़ा, या गैस-पेट्रोल और तेल की कमी जैसी स्थितियों से खुश नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना उसका अधिकार और मजबूरी है।

ईरान के प्रतिनिधि ने दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे अमेरिका पर दबाव डालें ताकि युद्ध को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि संघर्ष का सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ रहा है और वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि शांति बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

भारतीय जहाजों के आवागमन को लेकर पूछे गए सवाल पर इलाही ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों के निर्बाध गुजरने में कोई बाधा नहीं होगी। उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरानी दूतावास ने कुछ भारतीय जहाजों को इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने में मदद करने की कोशिश भी की थी।

जवाबी हमलों पर आलोचना का दिया जवाब
ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में किए जा रहे जवाबी हमलों पर उठ रहे सवालों के बीच इलाही ने कहा कि अमेरिका ईरान से हजारों मील दूर है, लेकिन उसने ईरान के आसपास कई सैन्य ठिकाने स्थापित कर रखे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने क्षेत्र में लगभग 45 ठिकाने बनाए हुए हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया जा रहा है। इलाही के अनुसार, युद्ध से पहले ईरान ने पड़ोसी देशों से अनुरोध किया था कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें।

इलाही ने आरोप लगाया कि बहरीन से दागी गई मिसाइलों में बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान के पास अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उन्होंने दोहराया कि ईरान का उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।

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